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110 अवैध इमारतों पर उल्हासनगर पालिका से कोर्ट का सवाल

बंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे जिले की उल्हासनगर नगर पालिका को निर्देश दिया है कि चार सप्ताह के अंदर एक हलफनामा जमा करके बतायें कि 2010 में तत्कालीन शहर नियोजक द्वारा मंजूर 110 अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
   
न्यायमूर्ति वी एम कनाडे और न्यायमूर्ति राजेश केतकर ने कल एक जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत को बताया था कि उसने 110 अवैध निर्माण कार्यों को लेकर लगे आरोपों की जांच के लिए पुणे में शहर नियोजन निदेशक की नियुक्ति की थी।
   
अदालत में दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि निगम में भ्रष्टाचार बड़े स्तर पर है और आरटीआई के आधार पर दावा किया गया कि 2010 में उल्हासनगर में अवैध तरीके से 110 निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई। उल्हासनगर पाकिस्तान के सिंध से विस्थापित हुए लोगों की कॉलोनी है जो विभाजन के बाद यहां आ गये थे।
   
उच्च न्यायालय ने 2005 में एक अन्य जनहित याचिका पर उल्हासनगर में 855 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था जो नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाई गयीं।
   
रवि तलरेजा और हरदास थरवानी द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा है जिसमें आरोप है कि तत्कालीन शहर नियोजक ए पी गुरगुले ने नगर पालिका के अधिकारियों के साथ मिलकर विकास नियंत्रण नियमों को तोड़ते हुए या तो 110 अवैध इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी या उनका नियमन किया।

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  • Web Title:110 अवैध इमारतों पर उल्हासनगर पालिका से कोर्ट का सवाल