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शादी के लिए जेल से रिहा हुआ कैदी

शादी के लिए जेल से बाहर जाने का नियम नहीं होने के बावजूद बंबई उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को सात दिन के लिए पैरोल पर छोड़ने का फैसला किया है, ताकि वह शादी कर सके।
  
न्यायमूर्ति पीवी हरदास और न्यायमूर्ति एम एल टाहिलियानी ने कहा कि यह सच है कि कैदियों को पैरोल और छुट्टी पर भेजने से संबंधित नियम 19 के अनुसार याचिकाकाकर्ता अपनी शादी के आधार पर पैरोल की मांग करने का हकदार नहीं है, फिर भी हम खास परिस्थितियों के मद्देनजर उसके आग्रह को स्वीकार करते हैं।
  
न्यायाधीशों ने हाल में अपने फैसले में कहा कि इस याचिका के जरिए पैरोल और छुट्टी पर कैदियों की रिहाई से संबंधित नियम 19 की व्याख्या को लेकर जटिल सवाल उठाया गया है।
  
याचिका में तर्क दिया गया था कि आशीष डोमनिक वारवरले की शादी एक चर्च में होनी है, क्योंकि वह और उसकी होने वाली पत्नी दोनों ईसाई हैं। रीति रिवाज के अनुसार याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी को शादी से पहले एक काउंसलिंग की आवश्यकता है और इसकी तारीख शादी की तिथि से एक दिन पहले है।
  
न्यायाधीशों ने उल्लेख किया, मामले में खास तथ्यों के मद्देनजर हम इस याचिका को मंजूर करने और उसे सात दिन के पैरोल पर रिहा करने को तैयार हैं, ताकि वह रीति रिवाजों में शामिल हो सके और शादी कर सके।
  
वारवरले फिलहाल नागपुर जेल में बंद है। इससे पूर्व उसकी याचिका नागपुर के मंडलायुक्त ने खारिज कर दी थी। उसने पांच जुलाई को इस फैसले को चुनौती दी थी।

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