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यह है डॉक्टरी का सपोर्ट सिस्टम

यह है डॉक्टरी का सपोर्ट सिस्टम

डॉक्टर बनने का सपना हर किसी का पूरा नहीं हो पाता, पर मेडिकल से संबंधित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो मरीज की सेवा व सहायता में उसी तरह जुटे हुए हैं, जैसे डॉक्टरी का पेशा। पैरामेडिकल उन्हीं में से एक है। इस प्रोफेशन के बारे में बता रही हैं  नमिता सिंह

पिछले कुछ वर्षों से लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। एक ओर जहां भौतिक सुख-सुविधा के साधन बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नतीजा, मेडिकल क्षेत्र की जिम्मेदारियां दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। मेडिकल से जुड़े कुछ अन्य क्षेत्र भी विस्तार प्रक्रिया में हैं। पैरामेडिकल उन्हीं में से एक है। पैरामेडिकल में मरीजों को इमरजेंसी में प्री-हॉस्पिटल सर्विस प्रदान की जाती है। इनका भी कार्य डॉक्टर से मिलता-जुलता है तथा इसमें डायग्नोसिस, फिजियोथेरेपी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि कार्य किए जाते हैं।

कहा जा सकता है कि पैरामेडिकल प्रोफेशनल का काम उपचार के दौरान मेडिकल टीम को सपोर्ट करना है। कई बार ऐसा होता है कि छात्र मामूली अंकों अथवा सीट की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में नाकाम रहते हैं। ऐसे छात्रों के लिए पैरामेडिकल एक बेहतर विकल्प के रूप में है। कई बार डॉक्टर के देख लेने के बाद इन विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है तो कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें डॉक्टर के देखने के पहले ही इनकी जरूरत महसूस होती है। खास कर मेडिकल और ट्रॉमा सेंटर इमरजेंसी व फ्रैक्चर मैनेजमेंट में इनकी विशेष जरूरत पड़ती है। युवाओं के लिए यह क्षेत्र संभावनाओं से भरा हुआ है। पैरामेडिकल से संबंधित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें रोजगार की आस पूरी हो सकती है।

फिजियोथेरेपी
यह सबसे तेजी से उभरते मेडिसिन क्षेत्रों में से एक है। इसमें शारीरिक व्यायाम अथवा उपकरणों के जरिए कई जटिल रोगों का इलाज किया जाता है। शारीरिक रूप से अशक्त होने, खिलाड़ियों में अर्थराइटिस व न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर आने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ली जाती है। इसके अंतर्गत हार्ट रेडिएशन, वॉटर थेरेपी, मसाज आदि को भी शामिल किया जाता है। इसमें प्रोफेशनल्स को ह्यूमन एनाटॉमी, हड्डियों की संरचना, मसल्स एवं नर्वस सिस्टम आदि की जानकारी रखनी पड़ती है।

रेडियोग्राफी
रेडियोग्राफी पैरामेडिकल के कोर्स से ही संबंधित एक विधा है, जिसमें रेडिएशन के सहारे डायग्नोसिस किया जाता है। आमतौर पर कहा जा सकता है कि रेडियोग्राफी में मुख्यत: भीतरी अंगों की फोटो ली जाती है। इसमें अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि शामिल हैं। एक रेडियोग्राफर को अस्पताल में मेडिकल टीम के साथ काम करना होता है। मेडिकल के क्षेत्र में तकनीक बढ़ने के साथ ही रेडियोग्राफर की भूमिका भी बढ़ती जा रही है।

ऑक्युपेशनल थेरेपी
पैरामेडिकल से ही संबंधित एक करियर ऑक्युपेशनल थेरेपी भी है। इसके अंतर्गत कुछ विशेष रोगों से जूझ रहे रोगियों का इलाज किया जाता है, जिससें न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के उपचार से लेकर अन्य कई तरह के शारीरिक व्यायाम कराए जाते हैं। कई बार मानसिक विकार आने पर कागज-पेंसिल के सहारे मरीजों को समझाया जाता है। ये मरीजों का पूरा रिकॉर्ड अपने पास रखते हैं। इसमें हर आयु-वर्ग के मरीज होते हैं।

मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी
मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी को क्लीनिकल लेबोरेटरी साइंस भी कहते हैं। इसके अंतर्गत डायग्नोसिस तथा रोगों से संबंधित टैस्ट किए जाते हैं, जिससे डॉक्टर को उपचार करने में आसानी रहती है। इसमें प्रोफेशनल्स दो तरह से काम करते हैं- टेक्नीशियन और टेक्नोलॉजिस्ट। मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट पांच प्रमुख क्षेत्रों जैसे ब्लड बैंकिंग, क्लीनिकल टेक्नोलॉजी, हेमैटोलॉजी, इम्यूनोलॉजी एवं माइक्रो बायोलॉजी में काम करते हैं। इनका काम बहुत ही जिम्मेदारीपूर्ण होता है, जबकि मेडिकल टेक्नीशियन टेक्नोलॉजिस्ट एवं सुपरवाइजर की देखरेख में लेबोरेटरी में रूटीन टैस्ट से संबंधित काम करते हैं। लेबोरेटरी में मशीनों को चालू करने से पूर्व टेक्नीशियन उनकी सफाई से लेकर मरम्मत आदि कार्य करते हैं।

माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजी
माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में हर वर्ष वृद्धि होती ही रहती है, परंतु गत कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में तेजी से उछाल आया है तथा यह नाम एक चमकदार और लाभ देने वाले करियर के रूप में सामने आया है। पैरामेडिकल के क्षेत्र में इसका पदार्पण माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में हुआ है। डॉक्टर भी माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट द्वारा तय की गई रिपोर्ट एवं खोज की गई दवाओं का सहारा लेते हैं।

ऑप्टोमेट्री
पैरामेडिकल एक्सपर्ट रोगों के डायग्नोसिस एवं उनके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी से संबंधित एक शाखा ऑप्टोमेट्री भी है। ऑप्टोमेट्री ऐसा विज्ञान है, जिसमें इंसान की आंखों की संरचना, उसकी कार्यविधि एवं अन्य जानकारी को शामिल किया जाता है। यह प्रोफेशन परीक्षण, सही डायग्नोसिस एवं उचित समय पर आंखों की देखभाल से संबंधित है। इसके अंतर्गत आंखों के प्रारंभिक लक्षण, लैंस का प्रयोग एवं अन्य दिक्कतों को परखा जाता है। जॉब पाने से पूर्व छात्र को ऑप्टोमेट्री में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना होता है। उसके पश्चात ऑप्टोमेट्रिक्स के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं। प्रमुख कोर्स के रूप में बैचलर ऑफ क्लीनिकल ऑप्टोमेट्री तथा डिप्लोमा इन ऑप्थैलमिक टेक्नीक, ऑप्थैलमिक असिस्टेंट व ऑप्टोमेट्री एंड रिएक्शन आदि कोर्स हैं।

स्पीच थेरेपी
स्पीच थेरेपी उपचार की ऐसी पद्धति है, जो उन लोगों के लिए है, जिन्हें बोलने में दिक्कत आती है। इसके अंतर्गत हकलाना, तुतलाना, श्रवण क्षीणता जैसी कई समस्याओं का इलाज संभव है। इनमें मुख्यत: व्यक्ति विशेष को बोलने में दिक्कत, एक ही शब्द को बार-बार दोहराना, सही शब्द का उच्चारण न कर पाना, भाषा तथा वाणी का विकास न हो पाना आदि आते हैं। वाणी दोष के साथ-साथ आवाज में भी दोष हो सकता है। जैसे लड़के की आवाज लड़की जैसी होना, आवाज का मोटा या पतला होना, आवाज की दुर्बलता, आवाज का बिल्कुल बंद हो जाना आदि सभी को स्पीच थेरेपी द्वारा ठीक किया जा सकता है।

मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन
एक समय ऐसा था, जब मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड हाथ से लिख कर रखा जाता था, परंतु अब यह प्रक्रिया हस्तलिखित न होकर कम्प्यूटर पर तैयार की जाती है। अमेरिका के डॉक्टरों के पास इतना समय नहीं रहता कि वह अपनी रिसर्च रिपोर्ट का रिकॉर्ड रखें। यह रिकॉर्ड इंश्योरेंस में क्लेम करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।  इस तरह की रिसर्च रिपोर्ट को भारत जैसे देश में पहुंचा दिया जाता है। यह रिकॉर्ड जिस व्यक्ति के पास आता है, उसे ‘मेडिकल ट्रांसक्रिप्शनिस्ट’ कहा जाता है। इस पूरी रिपोर्ट को भारतीय संदर्भ एवं भाषा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया ही ‘मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन’ कहलाती है।

विशेषज्ञ की राय
किन्हीं कारणों से डॉक्टर न बनने वाले छात्र पैरामेडिकल क्षेत्र में अपनी मंजिल तलाश सकते हैं। यह भी डॉक्टरी की भांति संतुष्टि व आमदनी वाला है।
डॉ. वी.पी. सिंह (डायरेक्टर)
दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, दिल्ली

फैक्ट फाइल
आवश्यक योग्यता

पैरामेडिकल के ज्यादातर कोर्स 10+2 के बाद ही कराए जाते हैं, लेकिन इन्हें करने के लिए छात्रों को फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलॉजी व इंग्लिश सहित बारहवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करनी होगी, क्योंकि पैरामेडिकल के कुछ कोर्सो के लिए बारहवीं में 60 प्रतिशत अंकों की दरकार होती है। मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन के लिए बायोलॉजी सहित स्नातक योग्यता मांगी जाती है।

स्किल्स
अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, टीम वर्क, मेहनती, रिस्क उठाने, दबाव को ङोलने जैसे गुण इस प्रोफेशन के लिए बहुत जरूरी हैं। अधिकांश काम मेडिकल उपकरणों के सहारे होता है। इसके लिए उनका ज्ञान बहुत जरूरी है।

एजुकेशन लोन
छात्रों को प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। जिस संस्थान में एडमिशन कराना हो, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खर्चो का ब्योरा बैंक को देना होता है। अंतिम निर्णय बैंक को करना होता है।

वेतन
इस क्षेत्र में आमदनी की कोई कमी नहीं है। शुरुआती दौर में प्रोफेशनल्स को 3-5 लाख रुपए प्रतिवर्ष का पैकेज मिलता है। जैसे-जैसे उनका अनुभव बढ़ता है, आमदनी भी बढ़ती जाती है। यदि वे अपनी यूनिट लगा कर काम कर रहे हैं तो फिर आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।

संभावनाएं
पैरामेडिकल से संबंधित कोर्स करने के बाद प्रोफेशनल्स को सरकारी व प्राइवेट हॉस्पिटल, इमरजेंसी सेंटर, ब्लड डोनेशन सेंटर, डायग्नोसिस सेंटर, फूड इंडस्ट्रीज, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, मेडिसिन लैब, मेडिकल बुक पब्लिशर्स, प्राइवेट डॉक्टर के ऑफिस व क्लीनिक आदि में नौकरी मिलती है। प्राइवेट काम भी कर सकते हैं। विदेशों में भी रोजगार के अवसर सामने आते हैं।

प्रमुख संस्थान
ऑल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली,
वेबसाइट-
www.aiims.edu
दिल्ली इंस्टीटय़ूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, नई दिल्ली, वेबसाइट- www.dipms.com
ऑल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन, मुंबई,
वेबसाइट-www.aiipmr.gov.in
जामिया हमदर्द, फैकल्टी ऑफ मेडिसिन, दिल्ली
वेबसाइट-
  www.jamiahamdard.edu
राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, बेंग्लुरू, वेबसाइट-  www.rguhs.ac.in
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लौर,
वेबसाइट
- www.cmch-vellore.edu
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (फैकल्टी ऑफ साइंस), वाराणसी
वेबसाइट
www.bhu.ac.in
आदित्य ज्योति इंस्टीटय़ूट ऑफ ऑप्टोमेट्री, मुंबई, वेबसाइट- www.ajoi.org
अली यावर जंग नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर हियरिंग हैंडिकैप्ड, मुंबई,
वेबसाइट
-www.ayjnihh.nic.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन,
वेबसाइट
www.iimt.org
(संस्थान की सूची सांकेतिक है। छात्र कोर्स के हिसाब से संस्थान चुन सकते हैं)

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