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युवी के लिए जीतो विश्व कप

टीम इंडिया एक बार फिर टी20 विश्व कप में खिताब की दावेदार के रूप में उतरने जा रही है। महेन्द्र सिंह धौनी की कप्तानी में टीम इंडिया दूसरी बार चैम्पियन बन अनूठा कीर्तिमान बनाने को बेताब है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के मुंबई स्थित मुख्यालय ‘क्रिकेट सेंटर’ में 2011 वनडे क्रिकेट का विश्व कप और 2012 अंडर-19 क्रिकेट का विश्व कप एक साथ शोभा बढ़ा रहे हैं। अब अगर भारतीय टीम टी20 का विश्व कप भी जीत ले तो ऐसा पहली बार होगा जब फटाफट क्रिकेट के सीनियर और जूनियर वर्ग सहित तीन विश्व खिताब एक साथ उसके नाम होंगे।  टीम इंडिया की संभावनाओं पर पेश है राकेश थपलियाल का आकलन
युवी के लिए जीतो टी20 विश्व कप। श्रीलंका में टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में यह नारा लगाया जा रहा है। यह इस बात का प्रतीक है कि टीम का हर खिलाड़ी कैंसर से जंग जीतकर क्रिकेट के मैदान में लौटे फाइटर युवराज को उनकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी पर टी20 विश्व कप के रूप में यादगार तोहफा देना चाहता है। आखिर वो युवराज ही थे जिन्होंने सचिन तेंदुलकर के लिए पिछले साल वनडे क्रिकेट का विश्व कप जीतने में जानलेवा बीमारी से जूझते हुए भी सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया था। तब युवी एकदम बदले हुए खिलाड़ी नजर आए थे और गेंद व बल्ले से लगातार श्रेष्ठ प्रदर्शन कर ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ भी बने थे। अब टीम इंडिया युवी के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने को बेताब है।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के मुंबई स्थित मुख्यालय ‘क्रिकेट सेंटर’ की अलमारी में इस समय 2011 वनडे क्रिकेट का  विश्व कप और 2012 अंडर-19 क्रिकेट का विश्व कप शोभा बढ़ा रहा है। अब अगर भारतीय टीम टी20 का विश्व कप भी जीत ले तो ऐसा पहली बार होगा जब फटाफट क्रिकेट के सीनियर और जूनियर वर्ग  सहित तीन विश्व खिताब उसके नाम होंगे।
भारत 2007 में  टी20 विश्व कप के पहले आयोजन का विजेता बना था। तब किसी ने भी उसे दावेदार नहीं माना था। इसकी वजह यह थी कि भारत ने विश्व कप से पूर्व महज एक टी20 मैच खेला था और उसके सितारे खिलाड़ियों ने राहुल द्रविड़, सौरभ गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने इसमें खेलने से इनकार कर दिया था। लेकिन  युवा महेन्द्र सिंह धौनी की कप्तानी में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने धमाकेदार प्रदर्शन से सभी को आश्चर्य चकित कर दिया था।

कैंसर से मौत की जंग जीतकर मैदान में वापसी करने वाले योद्धा युवराज सिंह के लिए टीम फिर से चैम्पियन बनने को बेचैन है। युवराज की टीम इंडिया में वापसी भी टी20 से कराई गई है। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में दिखा दिया है कि वो पूरी तरह से फिट होकर शानदार प्रदर्शन को आतुर हैं। टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण है।

अनुभव को हमेशा फायदे का सौदा माना जाता है। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि टी20 क्रिकेट के लिए युवा जोश भी कम जरूरी नहीं। सबसे बड़ी जरूरत खिलाड़ियों में कुछ कर दिखाने के जज्बे की है। इसके बिना विश्व स्तर पर सफलता नहीं मिल सकती है। भारत को ग्रुप ए में अफगानिस्तान और इंग्लैंड के साथ रखा गया है। अफगानिस्तान की टीम को अभी विश्व टी20 रैंकिंग में स्थान नहीं मिला है तो इंग्लैंड की टीम नंबर-1 के सिंहासन पर विराजमान है। भारत सातवें नंबर पर है। ग्रुप दौर की राह कठिन नहीं होनी चाहिए क्योंकि तीन में से दो टीमें सुपर-8 दौर के लिए क्वालिफाई करेंगी। लेकिन फिर भी शुरुआती मैच से ही सजगता बरतनी जरूरी है। टी20 मैचों में बल्लेबाजों का प्रभुत्व रहता है। इस लिहाज से देखें तो जैसे धाकड़ बल्लेबाज भारत के पास हैं वैसे किसी और टीम में नहीं हैं।

सलामी जोड़ी से शुरुआत करें तो विरेन्दर सहवाग और गौतम गंभीर ऐसे नाम हैं जो गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने के लिए पर्याप्त हैं। इसके बाद विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना और महेन्द्र सिंह धौनी का नंबर आता है। इनके अलावा रोहित शर्मा और मनोज तिवारी भी कम नहीं हैं। कोहली की बात करें तो वह ऐसे दमदार बल्लेबाज के रूप में उभरे हैं जिसे आक्रामक और सजगता के साथ टिककर और ठोककर दोनों तरह की बल्लेबाजी में आनंद आता है। वह जबर्दस्त फॉर्म में हैं।

यह विश्व कप उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। वह क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में फिट बैठते हैं और जरूरत पड़ने पर पारी की शुरुआत भी कर सकते हैं। वह तेज और स्पिन गेंदबाजों को समान प्रवाह से खेलते हैं। उनके स्ट्रोकों में ऐसी लय होती है कि देखने वाले देखते ही रह जाएं। युवराज सिंह के अंदर भी यह खूबी आ गई है कि कैसे टीम की जरूरत के हिसाब से खेला जाए। सुरेश रैना भी दमदार शॉट खेलने में माहिर हैं। वह भारत के एकमात्र खिलाड़ी हैं जिनके नाम टी20 विश्व कप में शतक है। उन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे विश्व कप में 101 रनों की शानदार पारी खेली थी। रोहित शर्मा जरूर पहले वाली फॉर्म में नहीं हैं लेकिन दम उनमें भी कम नहीं है। मनोज तिवारी भी लंबे समय से अपनी चमक दिखाने के मौके के इंतजार में हैं। यह विश्व कप उन्हें अपना जलवा दिखाने का बेहतरीन मंच देगा।

श्रीलंका में एक-दो सीजन से पिचों पर उछाल बढ़ा है और तेज गेंदबाजों को यहां गेंदबाजी में मजा आ रहा है। इसे देखते हुए जहीर खान, इरफान पठान, लक्ष्मीपति बालाजी और आशोक डिंडा की चौकड़ी पूरे जोश में रहेगी। जहीर खान 2007 के विश्व कप में टीम का हिस्सा नहीं थे लेकिन इस बार वह पूरा दमखम दिखाना चाहेंगे। इरफान के क्रिकेट खजाने में टी20 का विश्व कप है और वह चाहेंगे कि फिर से विश्व चैम्पियन का तमगा उन्हें मिल जाए। डिंडा टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने में जुटे हैं। वहीं बालाजी भी चोटों से उबरकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना दम दिखाने को बेताब हैं।
स्पिनरों की तिकड़ी में अनुभवी हरभजन सिह के लिए यह टीम इंडिया में ‘दूसरा जीवन’ है। वहीं अश्विन लाजवाब फॉर्म में हैं तो पीयूष चावला पर अपने चयन को सही साबित करने का दबाव है। कुल मिलाकर देखा जाए तो टीम इंडिया एक ऐसा ‘शानदार पैकेज’ है जिसमें चैम्पियन बनने के लिए जरूरी हर तत्व मौजूद है। गुड लक टीम इंडिया!

कमजोरी
भारत की जो ताकत है वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है। भारतीय बल्लेबाजी दुनिया में बेहद मजबूत मानी जाती है लेकिन यह कब ताश के पत्तों के महल की तरह ढह जाएगी कुछ नहीं कहा जा सकता है। एक वास्तविक तेज गेंदबाज की कमी है जो अपनी तेजी और स्विंग से बल्लेबाजों में दहशत बना सके। जहीर खान सटीक और स्विंग गेंदबाजी के महारथी जरूर हैं लेकिन उनकी फिटनेस का भरोसा नहीं रहता है। इरफान पठान वापसी के बाद लय में लौटे हैं लेकिन उनमें वो तेजी नहीं है जो बल्लेबाजों को बांध सके। लक्ष्मीपति बालाजी और अशोक डिंडा पर ज्यादा निर्भर नहीं रहा जा सकता है। टीम में एक बेहतरीन ऑलराउंडर नहीं है।

मजबूती
टीम इंडिया में स्टार बल्लेबाजों की भरमार है। ऐसे बल्लेबाज हैं जो अकेले अपने दम पर मैच में पासा पलट सकते हैं। इनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव भी खूब है। श्रीलंका की पिचों पर भारतीय बल्लेबाज खूब सफल रहते हैं। स्पिन गेंदबाजी में भारतीय टीम बेहद मजबूत है। ऑफ स्पिनरों की जोड़ी आर अश्विन और हरभजन के अलावा लेग स्पिनर पीयूष चावला के रूप में तीन खालिस स्पिनर होने के साथ-साथ कामचलाऊ स्पिनर जैसे सहवाग, रैना, रोहित और युवराज सिंह भी हैं। इरफान पठान एक ऑलराउंडर की तरह गेंद व बल्ले से चमक बिखेर सकते हैं तो युवराज बल्लेबाजी के साथ खब्बू स्पिन गेंदबाजी से विकेट चटका सकते हैं।

अगर भारत को एक बार फिर विश्व कप पर कब्जा जमाना है तो टीम में वापसी कर रहे युवराज सिंह जैसे कामचलाऊ गेंदबाजों को बड़ी भूमिका निभानी होगी। युवराज एक चैम्पियन खिलाड़ी हैं और उनके लौटने से टीम में संतुलन भी बन जाता है। हमारे पास कोई बड़ा ऑलराउंडर भी नहीं है इसलिए हमें कामचलाऊ गेंदबाजों पर निर्भर होना पड़ता है। युवराज के अलावा हमारे पास विराट कोहली, रोहित शर्मा और सुरेश रैना भी हैं। ये सभी एक-एक ओवर फेंक सकते हैं और इससे हमारा काम काफी आसान हो जाएगा। हम इस बार विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
महेन्द्र सिंह धौनी, कप्तान, भारत

सितारे
विराट कोहली
दिल्ली का यह मुंडा भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी सनसनी बन गया है। जब यह बल्ला लेकर क्रीज पर उतरता है तो विपक्षी गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक इसके जल्दी से आउट होने की दुआ मांगते है। विराट पिछले कुछ समय के दौरान पिच पर टिककर टीम की जरूरत के हिसाब से खेलने की आदत डाल निरंतर बेहतरीन पारियां खेलकर टीम इंडिया की रीढ़ बन गए हैं।

युवराज सिंह
भारतीय टीम में अगर किसी को ऑलराउंडर माना जा सकता है तो वह युवराज सिंह ही हैं। युवराज धाकड़ बल्लेबाज होने के साथ-साथ सटीक खब्बू स्पिन गेंदबाज और आला दर्जे के क्षेत्ररक्षक भी हैं। कैंसर से जूझने के बाद मैदान में उतर वह अपना लड़ाका जज्बा दिखा चुके हैं। विश्व कप से ठीक पहले खेले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में वह यह साबित कर चुके हैं कि उनके खेल में कमजारी नहीं आई है और वह अब भी पुराने फाइटर युवराज हैं। हो सकता है 2007 की तरह इस बार भी उनके बल्ले से छक्कों की बरसात हो।

विरेन्दर सहवाग
सहवाग यानी आग। वीरू जिस तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हैं वह टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी जरूरत है। सहवाग से यह उम्मीद की जा रही है कि इस बार विश्व कप में वह शुरुआत से ही विस्फोटक बल्लेबाजी कर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने का काम करेंगे। सहवाग बल्ला लेकर क्रीज पर खड़े हों तो गेंदबाज के लिए सिरदर्द बन जाते हैं। वीरू से इस विश्व कप में धमाकेदार पारियों की उम्मीद है। वह बल्ले के अलावा अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी पर भी बल्लेबाजों को नचा सकते हैं।

गौतम गंभीर
भारत की 2007 के टी20 विश्व कप में जीत के हीरो रहे थे। अपने आक्रामक तेवर और जानदार स्ट्रोकों से गेंदबाजों की बखिया उधेड़ने वाली बल्लेबाजी में उस्ताद हैं। सहवाग के साथ उनकी सलामी जोड़ी किसी भी आक्रमण को तहस-नहस कर सकती है। गंभीर के जोश में अब अनुभव भी जुड़ गया है। आईपीएल-5 में गंभीर अपनी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स को चैम्पियन बनाने में कप्तानी के साथ-साथ बल्ले से भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। विश्व कप में वह आईपीएल की फॉर्म और आत्मविश्वास के साथ उतर धमाका कर सकते हैं।

महेन्द्र सिंह धौनी
टीम इंडिया के कप्तान के लिए यह विश्व कप बेहद अहम है। वह लगातार रिकॉर्ड चौथी बार इसमें कप्तानी करने उतर रहे हैं। धौनी अफगानिस्तान के खिलाफ19 सितंबर को पहले मैच में बतौर कप्तान खेलने के साथ ही इंग्लैंड के पॉल कॉलिंगवुड के सबसे अधिक 17 मैचों में कप्तानी का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। धौनी की जी-तोड़ कोशिश रहेगी कि विश्व कप जीतें, अगर ऐसा हुआ तो वह दुनिया के पहले कप्तान होंगे जिनके नेतृत्व में टीम दो बार टी20 विश्व कप जीतने में सफल होगी। धौनी की कप्तानी में भारत टी20 2007 और वनडे 2011 जीत चुका है। धौनी पर बेहतरीन प्रदर्शन की जिम्मेदारी होगी।
टी20 विश्व कप में भारत-
पारी में सर्वाधिक स्कोर
218-4 (20 ओवर में), इंग्लैड के खिलाफ, किंग्समीड, 19 सितंबर, 2007
पारी में सबसे कम स्कोर
118-8 (20 ओवर में), द. अफ्रीका के खिलाफ, ट्रेंट ब्रिज, 16 जून, 2009
सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर
101, सुरेश रैना, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, ग्रोसलेट, 2मई, 2010
सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी
113 पर 4, आर पी सिंह, द. अफ्रीका के खिलाफ, किंग्समीड, 20 सितंबर, 2007
सबसे अधिक रन
444 रन 29.60 की औसत से, गौतम गंभीर, 16 मैचों में
सबसे अधिक विकेट
14 विकेट, 13.21 रन प्रति विकेट की औसत से, आर पी सिंह 9 मैचों में

 

 

 

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