DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मातृत्व का बंधन

बिस्तर पर लेटते ही उनके सवालों का पिटारा खुल जाता है। मैं दिन भर की थकान मच्छरदानी की तरह बाहर टांगकर सुकून से सोना चाहती हूं, पर दोनों तरफ से धाराप्रवाह सवाल ऊंघती आंखों पर पानी के ठंडे छींटें मारते हैं। मौसम कैसे बदलता है? बारिश कहां से आती है? आपके बाबा कहां चले गए? मर जाना किसको कहते हैं? हम सपने कैसे देखते हैं? सोने के लिए आंखें बंद क्यों करनी पड़ती हैं?..थककर मैं अपनी दोनों हथेलियों से उनके मुंह बंद कर देती हूं। अंधेरे में भी उनकी गोल-गोल आंखें सवाल करती नजर आती हैं। ये मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत लम्हे होने चाहिए। मुझ पर दो जिंदगियों की जड़ें मजबूत करने का दारोमदार है। मुझे चुना गया उस वरदान के लिए, जिसके लिए कई-कई सालों तक लोग पीर-फकीरों के दरवाजे चूमते हैं। फिर ये थकान क्यों? क्यों है बंध जाने की शिकायतें? किस बात का मलाल है? मातृत्व बंधन लेकर आता है। आप कई फैसले खुद से परे लेते हैं। बेपरवाह शामें छिन जाया करती हैं, घड़ी की सुइयों की गुलामी बख्श दी जाती है और अपने कपड़ों की सिलवटों में बच्चों के स्कूल ड्रेस के आयरन न होने की फिक्र दिखाई देती है।..ऐसा नहीं कि मैं भाग जाना नहीं चाहती। ऐसा भी नहीं कि शामें बच्चों के होमवर्क के बजाय एक तन्हा सफर के नाम करने की इच्छा नहीं होती। अपने वजूद का हिस्सा-हिस्सा बंटता है और अपनी क्षमताओं के आगे जाकर हर वह नामुमकिन काम करना सिखाता है मां बनना, जो कोई और रोल नहीं सिखा सकता।
बरगद में अनु सिंह चौधरी

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मातृत्व का बंधन