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मौन-मुखर अभिव्यक्तियां

अस्सी घाट का बांसुरी वाला नामक इस संग्रह की कविताएं जीवन की गति के नाम हैं। यह कवि का पहला संग्रह है, लेकिन इसमें शामिल कविताओं के हर भाव एक नए अनुभव की बात कहते दिखते हैं। कविताओं में मर्मस्पर्शी अनुभवों का चित्रण है और निजी पीड़ाओं और चिंताओं पर सोचते हुए उनके माध्यम से उन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करने का साहस भी। कवि अपने दायरे में अपनी कही पर खुद ही विचार करता दिखता है। अपने शब्दों की पहचान और समझ को पारिभाषित करने का यह अनूठा प्रयास कविताओं को नित नया आभास देता है। कविताएं सामाजिक दृष्टि से मुखर हैं और निजी स्तर पर ईमानदार आत्मावलोकन करती हैं। कवि का यह पहला प्रयास उम्मीद जगाता है।
अस्सी घाट का बांसुरी वाला, कवि : तजेन्दर सिंह लूथरा, प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन,
नई दिल्ली-1, मूल्य: 150 रु.

2. राजनीति की पाती
जैसा कि नाम से जाहिर है, पुस्तक में बिहार की राजनीति का एक बड़ा रूप पत्राचार के माध्यम से यहां दिखता है। यह पत्र वहां के दिग्गज राजनेताओं ने एक दूसरे को लिखे थे और उनकी राजनीति के नरम-गरम रूप इसके मार्फत यहां दिखते हैं। नए पुराने कई राजनेताओं के अनेक ऐसे पत्र पुस्तक में संकलित किए गए हैं, जिनमें बिहार की राजनीति के आरोप-प्रत्यारोपों का पता चलता है, और कुछ जाने-माने विवादों, सत्तासुख भोगते और सत्ताच्युत नेताओं की आहें-कराहें और उनके बीच कुछ निर्लिप्त व्यक्तित्वों की ईमानदार सामाजिक चिंताओं का ब्योरा देते कुछ पत्र भी हैं। राजनीति का पत्रचार या पत्रों में राजनीति कितनी सशक्त और आंखें खोल देने वाली हो सकती है, पुस्तक से पता चलता है।
बिहार-चिट्ठियों की राजनीति, संपादक: श्रीकांत, प्रकाशक: वाणी प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली-2, मूल्य: 200 रु.

3. कठोर यथार्थ के नाम
संजीव ठाकुर की पहचान अब तक एक कहानीकार की रही है। इस संग्रह से उन्होंने कविता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में पहला कदम रखा है। कविताओं की खासियत यह है कि इनमें कठोर यथार्थ की झलक मिलती है। जीवन संघर्ष और उससे उपजे पूर्वग्रहों और कुंठाओं को सीधे-सीधे कह डालने में कवि को गुरेज नहीं है। वह जीवन संघर्षो से होकर सामने आने वाले अनुभवों की फेहरिस्त बनाने में मुबतिला दिखता है और साथ ही अपने रिश्ते-नातों की धूप-छांव, बीते कल का रूमानी रूप, सामाजिक प्रतिबद्धता और संगीत पर भी बात करता है। कविताएं एक एक कर जीवनराग के कई नए अध्याय खोलती हैं।
इस साज पर गाया नहीं जाता, कवि: संजीव ठाकुर, प्रकाशक: मेधा बुक्स, नवीन शाहदरा, दिल्ली-32, मूल्य: 200 रु.

4. जासूसी दुनिया
यह जासूसी उपन्यास लेखक का पहला प्रयास है। हालांकि, परिचय में उनके कवि और सामाजिक शोधकर्ता होनी की भी बात की गई है। शायद यही कारण है कि एक जासूसी उपन्यास होने के बावजूद इसके कथानक में मौजूदा सामाजिक समस्याओं को केंद्र में रखा गया है। अपने कलेवर और ऊपरी रंग-रूप में यह उपन्यास इब्ने सफी की परंपरा से प्रेरित लगता है, लेकिन इसकी कथावस्तु कई जरूरी मसलों पर रोशनी डालती है। जासूसी उपन्यास में जरूरी हास्य-व्यंग्य का पुट भी इसमें है और रहस्य-रोमांच भी कूट-कूट कर भरा है, जिस दृष्टि से पाठकों को कोई निराशा नहीं होगी। संपादन की दृष्टि से भी उपन्यास में कुछ अतिरिक्त प्रयास कर लिया गया होता तो भाषा अधिक कसी होती।
दास्तान-ए-का.का.का., लेखक: इकबाल चौधरी, प्रकाशक: हार्परकॉलिंस पब्लिशर्स इंडिया, नई दिल्ली, मूल्य: 150 रु.

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