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जीतने का मतलब हराना नहीं

विप्रो कंपनी के सर्वेसर्वा अजीम प्रेमजी ने जिंदगी की हर बाजी जीती है। न सिर्फ अपने कारोबार को सफल बनाकर, बल्कि अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों में लगाकर भी वह एक नजीर बने हैं। इसलिए जब वह जीत की बात कहते हैं, तो उसका असर गहरा होता है। प्रस्तुत है आईआईएम, कोलकाता में दिया गया उनका एक भाषण-

खेलने के लिए जीत का जज्बा जरूरी है, लेकिन जीतने का मतलब दूसरों को हराना कतई नहीं है। जीत का मतलब है अपनी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करना। जब आप किसी लक्ष्य को पाने के लिए पूरी ताकत लगाते हैं, तब  आपको अपनी वास्तविक क्षमता का अहसास होता है। जीत का मतलब सिर्फ खुद के बारे में सोचना नहीं है, जीत का आशय है कि आप अपने साथ काम करने वाले लोगों को भी जीत के लिए प्रेरित करें, ताकि वे भी अपनी क्षमताओं का विकास कर आगे बढ़ सकें। जब मन में जीत का सपना होता है, तो आप पूरे जज्बे के साथ किसी मिशन पर काम करते हैं। यह जुनून, यह जज्बा ही आपको जीत की ओर ले जाता है।
प्रेरक सपने
सपने आपके सच्चे प्रेरक होते हैं। सपनों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मेरा अनुभव कहता है कि महान उपलब्धियां दो बार आकार लेती हैं: एक बार मस्तिष्क में, और फिर हकीकत में। युवा होने का सबसे रोमांचक पहलू है सपने देखने की क्षमता। जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आप महसूस करते हैं कि  हर सपने को साकार करना संभव नहीं है। लेकिन उम्र बढ़ने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप अपने सपने भूल जाएं। मेरा कहना है कि आप अपने अनुभव से सबक लेते हुए अपने सपनों को बदलाव के अनुरूप ढालें। बदलते हालात में आपको अपनी रणनीति और कार्यशैली बदलनी पड़ेगी, लेकिन सपने देखना मत बंद करें। सपने न केवल हमें सफलता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, बल्कि लक्ष्य प्राप्त करने की ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
डटे रहो
दिक्कतें चाहे जितनी आएं, डटे रहो। जिंदगी में जब लगे कि अब तो सब कुछ बिखर गया है तो आपके सामने दो ही रास्ते बचते हैं। एक तो पीछे हट जाएं और हालात के सामने हार मान लें, दूसरा यह है कि हालात का डटकर सामना करते हुए आगे बढ़ें। मुश्किलों का सबसे अच्छा पहलू यह है कि वे हमें और ज्यादा मजबूत और सहनशील बनाती हैं। सिर्फ  असाधारण योग्यता की मदद से आप विशेष उपलब्धि हासिल नहीं कर सकते हैं। बड़ी सफलता पाने के लिए आपके अंदर दृढ़ता और धीरज दोनों होना चाहिए। मैं आपको एक किस्सा सुनाता हूं। वर्ष 1972 में रग्बी टीम को ला रहा एक चार्टर्ड प्लेन एंडीज में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हफ्ते भर तक खोज करने के बाद राहत टीम ने मान लिया कि प्लेन में सवार सभी यात्राी मारे गए हैं। यह सोचकर राहत कार्य बंद कर दिए गए। लेकिन सच कुछ और था। जब कई दिनों तक राहत के लिए कोई नहीं पहुंचा, तो फंसे यात्राियों में से दो ने खुद अपनी मदद का फैसला किया। उन्होंने पैदल चलकर पहाड़ पार किया और चिली की ग्रीन घाटी में पहुंचे, ताकि वे बाकी यात्राियों की मदद के लिए कुछ इंतजाम कर सकें। अपनी मेहनत के बल पर वे अपने सभी साथियों की जान बचा सके। दुर्घटना के 70 दिन के बाद सभी यात्राी सकुशल लौट सके। आप में भी ऐसा ही जज्बा, तो कोई नहीं हरा सकेगा। 
डींगें न हांकें
अगर आप किसी चीज के बारे में नहीं जानते हैं, तो उसे स्वीकार करने में न झिझकें। यह दिखाना अच्छा है कि आप बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन आप सब कुछ जानते हों, यह जरूरी नहीं। अपने ज्ञान के बारे में बेवजह की डींग हांकने से कोई फायदा नहीं है। आज के युग में सूचनाओं का आदान-प्रदान इतना तेज हो गया है कि सबके लिए सब कुछ जानना संभव नहीं है। सच छिपाने से कोई लाभ नहीं होगा। हां, अगर हम सच स्वीकार करेंगे, तो लोग हमारी ईमानदारी का सम्मान जरूर करेंगे।
सफलता से आगे
कुछ लोग सफलता पाने के बाद आगे के बारे में सोचना बंद कर देते हैं। अपनी सफलता पर इतराने के बजाय बेहतर है कि आप इस बात पर विचार करें कि आगे क्या करना है। अगर आप आज की सफलता पर टिके रहेंगे, तो आने वाले अवसर से वंचित रह जाएंगे। मेरा मानना है कि भविष्य की चुनौतियों से डरने के बजाय उन्हें बेहतरीन मौकों के रूप में देखना चाहिए। दरअसल, ये मौके ही हमारे लिए अगली सफलता के रास्ते खोलते हैं।
मन लगाकर काम करें
जो काम करें, पूरे मन से करें। काम को सिर्फ पूरा करना जरूरी नहीं है। अहम बात यह है कि आपने किसी काम को कैसे किया है? दक्षता किसी तरह के सर्टिफिकेट से नहीं आती। दक्षता का मतलब है कि आप जो कुछ भी कर रहे हैं, उसे आपने पूरे मन और लगन से किया है। किसी काम से जुड़ी छोटी-छोटी चीजें भी अहम होती हैं। ये छोटी बातें ही आपके कार्य को दूसरों से अलग करती हैं। श्रेष्ठता आदत है, कार्य नहीं।
हमेशा खुश रहें
कार्य के प्रति गंभीर रहना ठीक है, लेकिन हर समय गंभीर रहने की जरूरत नहीं है। आपको हंसने-मुस्कराने के मौके खोजने चाहिए। इससे आप जीवन के प्रति सकारात्मक हो सकेंगे। खुश रहना भी एक आदत है। बेहतरीन जिंदगी के लिए यह आदत अच्छी है। खुशी आपके अंदर चुनौतियों से जूझने की ऊर्जा पैदा करती है।
लीडरशिप के मायने
जरूरी नहीं है कि आप हर समय लीडर बने रहें। सीखने के लिए जरूरी है कि आप खुद योगदान दें। कभी आपने आकाश में उड़ते हुए चिड़ियों के झुंड को देखा है? कैसे लंबी दूरी के रास्ते पर बारी-बारी से अलग-अलग चिड़िया इस झुंड का मार्गदर्शन करती है, ताकि किसी एक पर ज्यादा भार न पड़े। हर व्यक्ति की भूमिका अहम है। चाहे वायलिन बजाएं या फिर ड्रम, आप सब ऑर्केस्ट्रा के हिस्से हैं। लीडरशिप का मतलब सिर्फ अधिकारों का इस्तेमाल करना नहीं होता है, बल्कि इसका सही मायने है योगदान देना। लीडरशिप का मतलब अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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