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यहां मेरा कोई गॉडफादर नहीं है: यामी गौतम

चंडीगढ़ में पली-बढ़ी यामी गौतम आईएएस बनना चाहती थीं, मगर किस्मत उन्हें ग्लैमर वर्ल्ड में ले आई। टीवी शोज और साउथ की फिल्मों से होते हुए अब वह अपनी पहली हिन्दी फिल्म ‘विकी डोनर’ में आई हैं। प्रस्तुत है हाल ही में उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

एक्टिंग का शौक क्या बचपन से ही था?
बिल्कुल नहीं। मैं बचपन से ही स्टडी में काफी अच्छी थी और जब भी कोई मुझ से पूछता था तो मैं यही कहती थी कि मैं बहुत बड़ी ऑफिसर बनना चाहती हूं। लेकिन कहते हैं न कि यह भाग्य तय करता है कि आपको किस दिशा में जाना है।

तो फिर चंडीगढ़ से मुंबई तक आने और एक्टिंग में ब्रेक मिलने का सफर कैसे तय हुआ?
असल में मुंबई में हमारे कुछ फैमिली फ्रेंड्स हैं जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बिना मुझे बताए मेरे कुछ फोटोज मेरी मम्मी से ले लिए और मुंबई में कुछ लोगों को दिखाईं तो उन्हें वे पसंद आईं और उनसे कहा गया कि इस लड़की को बुला लीजिए। बस, इस तरह से यह सिलसिला शुरू हो गया।

टीवी से साउथ की तरफ कैसे जाना हुआ?
मैं जब मुंबई आई तो मैंने यह सोचा कि बस मुझे काम करना है। जब मुझे साउथ की फिल्मों से जुड़ने का मौका मिला तो मैंने तब भी उनके कंटेंट पर ही गौर किया और अब हिन्दी फिल्मों से जुड़ रही हूं तब भी यही सोचा है कि अच्छा काम मिलेगा तभी करूंगी।

क्या आज आपको लगता है कि एक्टिंग के कुछ कीटाणु आपके अंदर पहले से ही थे?
हो सकता है। मैं ऐसा कहूंगी तो लोग कहेंगे कि खुद अपनी तारीफ कर रही है, लेकिन मुझे लगता है कि मेरे अंदर जरूर कुछ रहा होगा जिसे फिल्म वालों ने देखा और मुझे काम करने के मौके दिए। मैंने अभी तक जो भी काम किया है वह बड़े बैनर्स के ही साथ किया है और उसकी तारीफ भी हुई है तो मुझे लगता है कि शायद मेरे अंदर पहले से कुछ था।

‘विकी डोनर’ कैसे मिली?
इस फिल्म के जो कास्टिंग डायरेक्टर हैं उन्होंने कहीं पर मेरा काम देखा था। उन्होंने मुझे बुला कर मेरा ऑडिशन लिया। इस तरह से मुङो यह फिल्म मिल गई।

किस तरह का किरदार है इस फिल्म में।
यह एक बंगाली लड़की का रोल है जिसका नाम है ऑशिमा रॉय। वह यंग है, मॉर्डन है लेकिन साथ ही अपने घर से भी जुड़ी हुई है और वैल्यूस को मानने वाली लड़की है। अपने पिता के साथ उसका बहुत ही खूबसूरत और अलग किस्म का रिलेशन है।

बंगाली लड़की के इस रोल के लिए आपने कैसे तैयारी की?
सबसे पहले तो फिल्म की टीम ने मेरे लुक पर काम किया। फिर शुजित सर ने भी मुझे काफी कुछ बताया कि तुम बहुत फास्ट बोलती हो जबकि बंगाली लड़कियां आमतौर पर काफी ठहराव के साथ बात करती हैं।

ऐसे बोल्ड विषय वाली फिल्म से शुरुआत करना क्या आपको थोड़ा रिस्की नहीं लगा?
आप जिस विषय को अनोखा और बोल्ड कह रहे हैं, मेरे ख्याल से वही इस फिल्म की ताकत है। जहां तक बॉक्स-ऑफिस की बात है तो आप जानते ही हैं आज के समय में कुछ भी हिट हो सकता है और कुछ भी फ्लॉप। आप पहले से कुछ भी दावे के साथ नहीं कह सकते। रही मेरी बात, तो मेरा यहां कोई गॉड फादर नहीं है।

क्या इस फिल्म के बाद सिनेमा का भी समाज पर असर पड़ेगा और इस मुद्दे पर समाज की सोच थोड़ी और खुलेगी?
मैं उम्मीद करती हूं कि ऐसा हो क्योंकि बहुत ही खूबसूरत फिल्म बनी है। यह एक बहुत ही संवेदनशील फिल्म है लेकिन इसे कमर्शियल एंटरटेनमेंट के ढांचे में रह कर बनाया गया है और मैं बिल्कुल उम्मीद करती हूं कि इसे देखने के बाद लोग इस टॉपिक को लेकर अवेयर हों और जो बेऔलाद लोग हैं वे इस बारे में सोचें।

साउथ में भी काम करती रहेंगी?
जी। अच्छा काम मुझे जहां भी मिलेगा, मैं मना नहीं करूंगी।

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