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कानपुर की सभी 231 टेनरियों को नोटिस

गंगा के पानी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों और रूख के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर की सभी 231 टेनरियों को नोटिस जारी किए हैं। इसने कहा है कि टेनरियों में बोर्ड द्वारा निर्धारित क्षमता से ज्यादा उत्पादन नहीं किया जाए। वे इस बारे में उल्लेख करें कि कितना पानी इस्तेमाल कर रहे हैं और कितना पानी गंगा में बहा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं किया गया तो बिना किसी अन्य नोटिस के अब सीधे टेनरी बंद करा दी जायेंगी।

सोमवार से इन टेनरियों का औचक निरीक्षण किया जायेगा और अगर कोई टेनरी निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन करती पायी गयी तो उसे अब कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा और उन्हें तुरंत बंद करा दिया जायेगा। टेनरियों के औचक निरीक्षण के लिये जिला प्रशासन ने एक कमेटी भी गठित कर दी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने शनिवार को कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल को गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण पर गहरी चिंता जताई थी। इसने बोर्ड को सख्त निर्देश दिये थे कि अगर गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण के लिये टेनरियां जिम्मेदार हैं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाये। इसने कहा था कि या तो टेनरियां निर्धारित सीमा के अन्तर्गत उत्पादन करें अन्यथा उन्हें तुरंत बंद कर दिया जाये।

गंगा में क्रोमियम और अन्य विषैले रसायनों की मात्रा काफी पायी गयी है। गंगा को विषैला बनाने में प्रदूषित पानी ही जिम्मेदार माना गया है। बोर्ड के इस नोटिस से टेनरी मालिकों में खलबली मच गयी है।

राधेश्याम ने बताया कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्धारित से ज्यादा मात्रा में चमड़े का उत्पादन करने पर टेनरियों पर प्रतिबंध लगाया था। इसमें प्रत्येक टेनरी के लिए बोर्ड ने उत्पादन की एक सीमा निर्धारित कर दी थी। इसके बाद भी टेनरियों में निर्धारित क्षमता से ज्यादा पानी लेकर चमड़े का उत्पादन किया जा रहा है और गंगा में गंदा पानी बहाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने कहा कि शहर की सभी 231 टेनरियों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निर्धारित सीमा से ज्यादा उत्पादन कतई न होने दे। इसी लिये सभी टेनरियों को नोटिस देकर कहा गया है कि निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन न करें। इसके साथ ही प्रतिदिन के हिसाब से टेनरी में आने वाले पानी और गंगा में बहाये जाने वाले पानी की रीडिंग के लिये मीटर लगाये जायें। इसकी एक लाग बुक बनाई जाये जिसे बोर्ड के अधिकारी जांच कर सकें और देख सकें कि जितने उत्पादन के लिये सीमा निर्धारित की गयी थी उतना ही पानी लिया और निकाला जा रहा है या नहीं।

इसके अतिरिक्त टेनरी से पानी की एक ही निकासी रखी जाये ताकि बोर्ड के अधिकारी उस निकासी पर लगे मीटर को जांच कर यह जान सकें कि किस टेनरी से कितना गंदा पानी गंगा नदी में बहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमवार से शहर में बोर्ड की टीम और जिला प्रशासन द्वारा बनायी गयी टीम औचक निरीक्षण करेंगी।

गौरतलब है कि शहर में अब तक 150 टेनरियां बद हो चुकी हैं। 64 टेनरियां अपने आप बंद हुई हैं जबकि बोर्ड के नियमों का पालन न करने पर 86 टेनरियों को बंद कराया जाया चुका है।

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