DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बयान पर हंगामे के बाद पलटे बसु

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने आर्थिक सुधारों पर दिए गए अपने बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा खड़ा होने के बाद मामले को सम्भालने की कोशिश करते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका बयान कि भारत में आर्थिक सुधारों की गति वर्ष 2014 के बाद गति पकड़ेगी, आम चुनावों से सम्बंधित न होकर सम्भावित यूरोपीय संकट से था।

इसके पहले बसु के बयान पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि सरकार नीतिगत निर्णय करने में अक्षम हो गई है, जबकि एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्ष के असहयोगात्मक रवैये के चलते विधेयक पारित नहीं हुए।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जहां सरकार को आर्थिक सुधारों की राह पर आगे बढ़ने पर चेताया वहीं, जनता दल (युनाइटेड) ने कहा कि अर्थव्यवस्था को आर्थिक उपचारात्मक उपायों की जरूरत है।

ज्ञात हो कि मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक कौशिक ने बुधवार को वाशिंगटन की संस्था 'कार्नेगी एंडाओमेंट फार इंटरनेशनल पीस' के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगले संसदीय चुनावों से पहले भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना मुश्किल है।

कौशिक ने अपने सम्बोधन में भ्रष्टाचार एवं घोटालों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार के होने, भ्रष्टाचार एवं घोटालों ने आर्थिक सुधारों की गति धीमी की है और नौकरशाही फैसला करने में जोखिम नहीं उठा रही है।

भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि घोटाले में फंसी सरकार अपनी सहयोगियों का विश्वास खो चुकी है। रूडी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बसु के बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

रूडी ने कहा कि बसु का बयान नीतिगत फैसला करने में सरकार की गतिहीनता को प्रदर्शित करता है जिसके बारे में हम बात करते आए हैं..यह संकेत है कि सरकार ने अंतिम रूप से यह कह दिया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान अब कोई आर्थिक सुधार करने वाली नहीं है।

पार्टी की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा कि सरकार शासन करने की इच्छाशक्ति खो चुकी है। विधायिका के फैसले न्यायालय के पास भेजे जा रहे हैं। सरकार के अंदर से अलग-अलग विभिन्न विचार आ रहे हैं।

जद(यू) नेता एन.के. सिंह ने बसु के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बसु ने विधेयकों को पारित कराने में होने वाली मुश्किलों के बारे में बताया है जो कि एक सकारात्मक बात नहीं है।

वहीं, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि बसु ने सरकार की नीतिगत गतिहीनता के बारे में नहीं कहा है। सोनी ने कहा कि संसद के पिछले दो सत्रों में जो कुछ हुआ है और 40-50 विधेयकों पर चर्चा में विपक्ष ने जो असहयोगात्मक रवैये दिखाया है, बसु का बयान उससे सम्बंधित है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा कि दुनिया के कुछ भागों में आर्थिक मंदी के बावजूद भारत ने करीब सात फीसदी की विकास दर दर्ज की है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि भारत ने आर्थिक सुधारों की पहल न करते हुए पिछले समय की आर्थिक मंदी से खुद को बचा पाने में सफल हो गया।

येचुरी ने कहा कि यहां एक उगता और एक बदहाल भारत है। यह दूरी और चौड़ी हो रही है। हमें इस दूरी को पाटने की जरूरत है और यह दूरी इस तरह के सुधारों से पटने नहीं जा रही है।

अपने बयान पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोपों एवं प्रत्यारोपों का दौर शुरू होने के बाद बसु ने मामले को नरम करने की कोशिश की। बसु ने कहा कि उनका बयान कि भारत में आर्थिक सुधारों की गति वर्ष 2014 के बाद गति पकड़ेगी, आम चुनावों से सम्बंधित न होकर सम्भावित यूरोपीय संकट से था।

बसु ने एक बयान में कहा कि कार्नेगी कार्यक्रम में मेरे बयान का सार यह है कि वर्ष 2014 एक महत्वपूर्ण वर्ष है क्योंकि कई यूरोपीय बैंकों को 1.3 खरब डॉलर मूल्य के कर्ज को जिसे उन्होंने यूरोपीय केंद्रीय बैंक से प्राप्त किया है, लौटाना शुरू करना होगा।

उन्होंने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीकों से लिया गया। वर्ष 2014 में यूरोप के हालातों के बारे में दिए गए मेरे बयान को इसी वर्ष भारत में होने वाले आम चुनावों से जोड़ा गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि मेरे सम्बोधन के मुख्य संदेश में वर्ष 2014 के सम्भावित यूरोपीय संकट और इसके बाद भारत की चीन से आगे निकलने की सम्भावना निहित थी।

बसु ने कहा कि वाशिंगटन की संस्था 'कार्नेगी एंडाओमेंट फार इंटरनेशनल पीस' के कार्यक्रम में व्यक्त उनके विचार निजी थे और उनके बयान को सरकार के वक्तव्य के रूप में न देखा जाए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बयान पर हंगामे के बाद पलटे बसु