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फिर वही ढाक के तीन पात

पहले कभी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश या उद्यम प्रदेश बनाने का दावा किया जाता था। इधर जब से पिता का चमरौधा पुत्र को पूरा फिट आ गया है, तब से कुछ आलोचक उत्तर प्रदेश को पुत्तर प्रदेश कहने लगे हैं। चौराहों की नीली झंडियां भले हट गई हों, मगर आसमान अब भी नीला है।

मलिहाबादी आमों पर व्यवस्था परिवर्तन का कोई असर नहीं पड़ा। वे हमेशा की तरह इस बार भी झुलसा, भुनगा और खर्रा रोग से ग्रस्त हैं। सड़कों का डामर अब बस पिघलने वाला है। गैरकानूनी फिरौती अब भी जारी है। कुछ दिन पहले पुलिस विभाग में गांधीगिरी अनिवार्य कर दी गई थी।

इसके अंतर्गत चौराहों पर पुलिस हेलमेट विहीन सवारियों और ज्यादा सवारी बिठाए लोगों को रोककर गुलाब के फूल भेंट करती थी, ताकि उन्हें ग्लानि हो, मगर ये हो न सका, क्योंकि फूल पकड़ाती पुलिस का अंदरूनी स्वभाव पहले जैसा था, यानी- अबे ओ, श्रीमानजी। पकड़ फूल साले। आगे से ऐसा किया, तो यह डंडा देखा है न। यह वचन सुन आरोपी अपनी मृतात्मा पर फूल चढ़ाकर नौ-दो-ग्यारह हो जाता था।

इधर यूपी में नौजवानी बड़ी डिमांड पर है। अधेड़ बालों पर खिजाब लगाने लगे हैं। लाल टोपी पहनने से जो शरमाते थे, वे अब लाल कैप लगाने लगे हैं। एहतियात बरती जा रही है कि यह वाला लाल रंग वामपंथी न लगे। नवयुवकों को सफेद कुरता ज्यादा रास आ रहा है। यहां भी यह एहतियात बरती जा रही है कि सफेद कुरते में कांग्रेसी युवा न लगें। बहुत से नए युवा तो अभी तक अखिलेश मार्का काली सदरी डाले हैं। इच्छा न हो, तो गरमी नहीं लगती। परंपरा का पवित्र पतन हो रहा है। आधुनिक अनारकलियां अपने सलीम को छोड़ डिस्को जाने लगी हैं। सलीम खुद जहांगीर होने की फिराक में है, ताकि नूरजहां मिल सके।

नीर क्षीर विवेक की रस्सी पर नए नट संतुलित रहने के अभ्यास कर रहे हैं। जेल काटकर आए विधायक को जेल सुधार का दायित्व सौंप दिया गया है। सुना है, जब जन लोकपाल विधेयक पारित हो जाएगा, तब इस विभाग में भ्रष्टाचार सुधार का दायित्व कलमाडीजी को दे दिया जाएगा। वह तो अब भी इतने क्यूट लगते हैं, जैसे कह रहे हों- मइया मोरी, मैं नहीं माखन खायो।

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