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नसीब अपना-अपना

सुबह टेलीविजन देख रहा था। कुछ खबरें याद रहीं। जैसे, अमेरिका में कुत्तों के लिए एक टेलीविजन चैनल खुला, भारत में अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण, कानपुर में एक प्रिंसिपल पर जानलेवा हमला आदि। कुत्तों के टीवी चैनल के बारे में खबर में बताया गया कि यह टीआरपी की दौड़ के चक्कर में नहीं फंसेगा। न ही इसमें विज्ञापन होंगे। पांच डॉलर का यह चैनल उन कुत्तों के मनोरंजन के लिए होगा, जिनके मालिकों के पास उनकी देखभाल का समय नहीं है। वे दफ्तर चले जाएंगे, तो उनके कुत्ते अपना टीवी चैनल देखकर मजे करेंगे। इस खबर का लोग अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण करेंगे।

सबसे पहले तो यही लगा कि अमेरिका में कुत्तों तक की ऐश है। क्या पता, कोई चिढ़ा हुआ अमेरिकी यह भी कहे कि अमेरिका में केवल कुत्तों की ही ऐश है! पांच डॉलर मतलब अपने देश के पांच गरीबी रेखा के नीचे वालों की दिहाड़ी से भी अधिक। हमें अमेरिकी कुत्तों से जलन नहीं है। सबका अपना-अपना भाग्य है। भारत में भी ऐसे कुत्तों की कमी नहीं है। बस चैनल चालू होना है। जल्दी ही वह हो जाएगा। अमेरिकी फैशन के भारत आने में ज्यादा समय नहीं लगता। एक अन्य समाचार में बताया गया कि कानपुर में कुछ लोगों ने प्रिंसिपल पर गोली चलाई। पहले गोली ड्राइवर को लगी, फिर प्रिंसिपल को। ड्राइवर मर गया। प्रिंसिपल घायल हैं। खबर के शीर्षक में प्रिंसिपल पर हमले का जिक्र था। शीर्षक से ड्राइवर का जिक्र गायब था। शीर्षक में आने के लिए आदमी का प्रिंसिपल होना जरूरी है। 

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