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सियाचिन का समाधान

जनरल कियानी के बयान सियाचिन से फौज हटाने के पक्ष में हैं। दरअसल, हुकूमत, विपक्ष और फौज के स्तर पर यह आम सहमति बनने लगी है कि इस मैदान-ए-जंग को खत्म किया जाए। उनका यह बयान तब आया है, जब वह सदर जरदारी के साथ सियाचिन दौरे पर थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही यहां एक कुदरती कहर टूटा, जिसमें कई पाकिस्तानी फौजी समेत आम लोग बर्फ के अंदर दफ्न हो गए।

वैसे, सियाचिन मसले पर हिन्दुस्तान से दूसरे दौर की बैठक बाकी है। ऐसे में, यही मुफीद वक्त है, जब इस विवादित मसले का सियासी हल निकाला जा सकता है। हालांकि बहुत कम लोगों को, चाहे वे हिन्दुस्तानी ही क्यों न हों, यह लगता है कि इससे बेहतरी की उम्मीद है। कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि हाल की घटना क्या एक बेहतर प्रेरक की भूमिका निभा सकती है? सच्चाई यही है कि दोनों मुल्कों के रिश्ते पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं। इससे उम्मीद बनती है कि सियाचिन मसले पर बेहतर नतीजे के आने का सही माहौल यही है।

जनरल कियानी के बयान का मतलब सियाचिन तक ही सीमित नहीं है। इनमें वे सारी बातें शामिल हैं, जिनके बूते मुल्क की पुख्ता हिफाजत की जा सकती है। फौज के मुखिया की बेबाक राय जमीनी हकीकत के काफी करीब है और स्वागत के लायक है। उन्होंने बताया कि मुल्क की हिफाजत महज फौज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था की मजबूती पर सारा दारोमदार होता है।

बहरहाल, रक्षा क्षेत्र में खर्च न्यूनतम स्तर पर पहुंच भी  जाए, तब भी पाकिस्तान की चिंता बनी रहेगी। मसला यह भी है कि मुल्क की पूर्वी सीमा पर डर व संदेह को किस हद तक कम किया जाए। वैसे प्रत्यक्ष कारोबार में माहौल बदलने की ताकत है, पर इसके लिए दो-चार कदम साथ चलना होगा। सियाचिन या सरक्रीक मसले पर पाकिस्तान ने अपना सुझाव रखा, पर हिन्दुस्तान को वह नागवार गुजरा। इन सबसे अलग हटकर देखें, तो यह सच है कि इससे अफगानिस्तान में भारत की भागीदारी बढ़ेगी। यह एक अच्छा मौका है, जिसके जरिये पाकिस्तान-हिन्दुस्तान आपसी भरोसे की बहाली पर जोर दे सकते हैं।

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