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मिनी इंडिया है यहां

मिनी इंडिया है यहां

जानीमानी नृत्यांगना पपीहा देसाई को दिल्ली में बसे चार दशक हो गए। वह मानती हैं कि दिल्ली की खूबसूरती और इसका कॉस्मोपोलिटन चरित्र इसे अपने आप में एक भारत बनाता है, जिसे हम मिनी इंडिया कहते हैं। उनसे सत्यसिंधु की बातचीत

दिल्ली आपको कैसी लगती है?
बहुत ही सुंदर और मनमोहक शहर है यह। एक ऐतिहासिक शहर भी है दिल्ली। एक हजार साल की कहानी दिल्ली में समाई हुई है। ब्रिटिश ने इसे राजधानी बनाया। उससे पहले यह मुगलों की राजधानी थी। शानदार इमारतों से दिल्ली सुसज्जित है। लाल किला, कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, पुराना किला आदि को देखकर और उसका इतिहास सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यहां पर विश्व प्रसिद्ध व्यापार मेला लगता है, जो एक सांस्कृतिक गढ़ बन गया है। मंडी हाउस की चहल-पहल, जो सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्रों से सजी है। यहां भारतीय कला केन्द्र है जहां मैंने ओडिसी नृत्य सीखा। कमानी ऑडिटोरियम, रबीन्द्र भवन, एनएसडी, कथक केन्द्र, श्रीराम सेंटर, त्रिवेणी कला संगम, फिक्की, प्रसार भारती, सब एक से बढ़कर एक हैं।

इससे कैसे जुड़ीं?
जब मैं 6 महीने की थी, तभी मम्मी-पापा के साथ कोलकाता से यहां आने लगी थी। पिताजी श्री योग सुंदर देसाई नृत्य जगत के जानेमाने नाम रहे हैं। उन्होंने श्रीराम भारतीय कला केन्द्र की रामलीला को 1966 में डायरेक्ट किया था। वे संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से भी सम्मानित हैं। उनकी संस्था इंडियन रिवाइवल ग्रुप भी काफी काम करती थी, जिसकी स्थापना उन्होंने 1948 में की थी। उनके साथ अक्सर दिल्ली आना होता था, लेकिन जब मैं 5 साल की थी तो यहां पूरी तरह रहने आ गई थी। अब तो 40 साल हो गए यहां आए हुए।

ऐसी बातें जिन्हें आप दोस्तों के बीच शेयर करने में गर्व महसूस करती हैं?
दिल्ली की खूबसूरती और इसका कॉस्मोपोलिटन चरित्र इसे अपने आप में एक भारत बनाता है, जिसे हम मिनी इंडिया कह सकते हैं। सभी प्रदेशों के लोग यहां बसते हैं, जिससे एक अलग ही अंदाज आ गया है दिल्ली में। भारत का प्रतीक है यह शहर।

आप इतने वर्षों से इस शहर को देख रही हैं। क्या बदलाव महसूस करती हैं?
दिल्ली में अब हर प्रदेश के लोग बसते हैं। हम कह सकते हैं कि दिल्ली पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है। यहां हर भारतीय उत्सव मनाया जाता है। पहले जब स्कूल में पढ़ती थी तो यहां ज्यादातर उत्तर भारत के लोग रहते थे।

सांस्कृतिक माहौल में क्या बदला?
दिल्ली भारत की सांस्कृतिक राजधानी बन गई है। हर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम और उत्सव की प्रस्तुति दिल्ली में होती है। इस तरह यह शहर संस्कृति कॉस्मोपोलिटन बन गया है।

यहां की कौन-कौन सी बातें आपको बहुत पसंद हैं?
मंडी हाउस बहुत पसंद है, जहां रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा पुरानी दिल्ली का खाना, रंग-बिरंगा दिल्ली हाट, यहां की विश्व प्रसिद्ध धरोहर और ऐतिहासिक इमारतें, यहां की खूबसूरती, पेड़-पौधों से आच्छादित चौड़ी सड़कें, राष्ट्रपति भवन, मुगल गार्डन, संसद भवन, नॉर्थ एवेन्यू जहां मेरा बचपन बीता है, यहां की गणतंत्र दिवस परेड, विभिन्न प्रदेशों के लोगों के नव वर्ष के आयोजन, सब खास हैं। मुझे यहां विभिन्न प्रदेशों के आयोजनों में शामिल होकर बड़ा आनन्द आता है।

और कौन-कौन सी बातें पसंद नहीं हैं?
दिल्ली में महिलाएं असुरक्षित हैं। यहां आए दिन महिलाओं के साथ ज्यादती, हत्या, बलात्कार आदि की घटनाओं की खबरें मीडिया में आती रहती हैं। खासकर पूर्वोत्तर की लड़कियों के प्रति यहां नजरिया ठीक नहीं है। उन्हें तंग किया जाता है। यह बात मुझे बहुत परेशान करती है। ऑटो रिक्शा और टैक्सी वाले मनचाहा किराया वसूलने की कोशिश करते हैं और बुरा व्यवहार करते हैं। ये बातें बहुत परेशान करती हैं कि देश की राजधानी में यह स्थिति है। सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है।

खाने की कौन-कौन सी जगहें पसंद हैं और क्यों?
पुरानी दिल्ली की परांठे वाली गली के दाल, गोभी और मटर के स्टफ परांठे, दही भल्ले और पापड़ी मुझे बहुत पसंद हैं। बंगाली मार्केट की चाट और छोले-भठूरे बचपन से ही आकर्षित करते रहे हैं। दिल्ली हाट में खासकर केरल, बंगाल, महाराष्ट्र, नगालैंड का खाना और असम भवन के जाकोई रेस्टोरेंट की थाली, राजधानी रेस्टोरेंट की गुजराती थाली अच्छी होती है। बंगाली गाने का मजा बारिश के मौसम में और बढ़ जाता है, जब हिलसा मछली का मौसम होता है।

दिल्ली में बिताए इन वर्षों में आप खुद में क्या-क्या बदलाव पाती हैं?
चाहे और कुछ न बदले पर यह बदलाव तो दिल्ली में आ ही जाता है कि आप बहुत व्यस्त हो जाते हैं। पहले जैसा समय नहीं मिलता, व्यस्तता बनी रहती है।

आपकी पूरी दिनचर्या क्या होती है?
कोई निश्चित दिनचर्या नहीं है। जो काम और योजनाएं चल रही हैं, उनके मुताबिक समय तय करना पड़ता है। आमतौर पर जब दिल्ली में होती हूं तो दिन में ऑफिस के कार्य और अभ्यास चलता रहता है और शाम में या तो कार्यक्रम प्रस्तुत करना या फिर किसी न किसी कार्यक्रम में शामिल होना रहता है।

फुरसत में क्या करना पसंद करती हैं?
फुरसत में खासकर नृत्य की नई प्रस्तुतियां देखना पसंद है। नाटक और संगीत के कार्यक्रमों में भी रुचि है और पढ़ने का भी बहुत शौक है।

आपके लिए सफलता क्या है?
जिस कार्य में रुचि है, उसमें जीवन बिताना ही सफलता है। इससे जीवन में आंतरिक खुशी मिलती है और जिस व्यक्ति के अंदर आनन्द होता है तो ऐसे व्यक्ति से पृथ्वी और प्रकृति को कोई क्षति नहीं पहुंचती।

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