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ड्राइवर की नजर चूकने पर भी नहीं भिड़ेंगी ट्रेनें

सर्दियों के दौरान घने कोहरे में बीते कई साल से लगातार बड़े रेल हादसे ङोल रहे उत्तर मध्य रेलवे के गाजियाबाद-मुगलसराय रूट पर अब रेल सफर महफूज होगा। ड्राइवर की लापरवाही या सिस्टम में गड़बड़ी होने पर एक्चुअल ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निग सिस्टम एहतियात अपनाते हुए खुद-ब-खुद ट्रेन की ब्रेक लगा देगा।

रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे को एक्चुअल ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निग सिस्टम (एटीपीडब्लूएस) अपनाने के लिए अनुमति दे दी है। इसके तहत रेलवे ट्रैक पर सेंसर लगाया जाएगा। जो कि तार के माध्मय से सिगनल से जुड़ा होगा। इसके साथ ही इंजन में सिस्टम रखा जाएगा। ट्रैक पर लगे सेंसर में सिगनल की सारी सूचनाएं आएंगी।

इन सूचनाओं के आधार पर इंजन में ड्राइवर के सामने लगी स्क्रीन पर सिस्टम एलर्ट जारी करेगा। एलर्ट के अनुपालन में ड्राइवर की ओर से अगर कोई भी लापरवाही हुई तो सिस्टम इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक देगा। इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा एक ही ट्रैक पर ट्रेनों की भिड़ंत टालने में होगा। कोहरे के कारण आगे खड़ी ट्रेन न देख पाने की वजह से बीते कुछ सालों में कई हादसे हो चुके हैं। एटीपीडब्लूएस आगे खड़ी ट्रेन के बारे में ड्राइवर को पहले से ही सावधान कर देगा।

क्या है एटीपीडब्लूएस
एटीपीडब्लूएस ऑटोमेटिक सेंसर की प्रणाली है। इसके जरिए ट्रेन की स्पीड, सिगनल की स्थिति, ट्रैक की स्थिति की जानकारी लोको पायलट को हो जाएगी।

गाजियाबाद से कानपुर तक हुआ फील्ड वर्क
इस प्रणाली को विकसित करने के लिए गाजियाबाद से कानपुर तक का फील्ड वर्क पूरा हो चुका है। अब कुछ काम बाकी है। यह भी जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। गाजियाबाद, टूंडला और कानपुर के बीच 414 किमी. रूट पर लगभग 100 इंजन को इस सेंसर से जोड़ा जाएगा। नैनी से मुगलसराय के बीच ऑटोमेटिक सिग्नलिंग का काम शुरू हो चुका है। इस काम को इसी साल पूरा होना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।

आगरा-पलवल सेक्शन से शुरुआत
एटीपीडब्लूएस को अपनाने की शुरुआत उत्तर मध्य रेलवे में आगरा-पलवल सेक्शन से कुछ साल पहले हुई। पर यह सिस्टम काफी महंगा है इसलिए इसके विस्तार में देरी हुई।

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