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यूपीएफसी के जिंदा होने की जगी उम्मीदें

वेंटीलेटर पर चल रहे उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (यूपीएफसी) के चालू होने की उम्मीद एक बार फिर जगी है। औद्योगिक विकास आयुक्त ने निगम में जान फूंकने में रुचि दिखाई है।
सूबे के उद्योगों को आर्थिक और तकनीकी रूप से मदद के लिए गठित दोनों संस्थाएं यूपीएफसी और पिकप निष्क्रिय हैं। गुरुवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास आयुक्त रंजन कुमार के सामने दोनों संस्थानों ने रिवाइवल के लिए प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण किया।

यूपीएफसी उद्योगों को फाइनेंस करता है, यह पैसा सिडबी से मिलता है। इसके अलावा यूपीएफसी प्राइवेट बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाता है, जिसकी गारंटी राज्य सरकार लेती है। वर्ष 2002 से राज्य सरकार ने गारंटी लेने से इनकार कर दिया। निगम की साख रेटिंग गिरने से सिडबी ने भी रकम नहीं दी। यहीं से यूपीएफसी का आर्थिक संकट शुरू हुआ। पिछले चार साल में निगम ने अपनी डूबी रकम अपने दम पर वसूल कर हालात तो सुधारे ही, अपनी छवि भी अच्छी की है। रेटिंग में सुधार से सिडबी फिर फाइनेंस करने के लिए तैयार है।

यूपीएफसी राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अनूप द्विवेदी ने बताया कि यूपीएफसी को चालू करने के लिए सिर्फ तीन सौ करोड़ रुपयों की जरूरत है। पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यूपीएफसी को पुर्नजीवित करने में विकास आयुक्त ने रुचि दिखाई है। हरी झंडी मिलते ही राज्य सरकार प्राइवेट बॉन्ड की गारंटी भी लेगी और निगम को नई जिंदगी मिल जाएगी।

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