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पड़ोसी मुल्कों से पोलियो वायरस आने का खतरा

सवा साल से देश में पोलियो का एक  भी केस नहीं मिला है लेकिन पड़ोसी मुल्कों के प्रवासी लोगों के आने-जाने से कानपुर समेत प्रदेश के 27 जिलों में पोलियो के वायरस आने का खतरा बना हुआ है। दो दिन से शहर में मौजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने लगातार पोलियो अभियान चलाने की जरूरत बताई है। अब पोलियो अभियान में पहली बार स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों को लगाया गया है।

शहर में पाकिस्तान और बांग्लोदश के नागरिकों का लगातार यहां आना-जाना और भारतीयों का वहां जाना बना हुआ है। अभी पड़ोसी मुल्क पोलियो मुक्त नहीं हुए हैं इसलिए देश में बच्चाों को पोलियो की आशंका बनी हुई है लेकिन अल्पसंख्यकों में पोलियो दवा पिलाने को लेकर जागरूकता का अभाव डब्ल्यूएचओ की टीम को मिला है। टीम के मुख्य सदस्य डॉ.सचिन रेवरिया की मानें तो इस खतरे को देखते हुए केन्द्र सरकार भी गंभीर है।

तमाम विचार-विमर्श के बाद तय हो चुका है कि पल्स पोलियो अभियान में दस चक्र होंगे। लोगों को दवा पिलाने से नजरअंदाज करना कभी भी बड़ी मुसीबत को जन्म दे सकता है। वैसे भी हज के वक्त पहले देश में और फिर सऊदी अरब में पोलियो दवा पिलाई जाती है इसलिए इसे यहां के लोगों को समझना चाहिए। अभी पाक,नाइजीरिया,अफगानिस्तान और बांग्लादेश में पोलियो के मरीज मिल रहे हैं। इसी आशंका को देखते हुए केन्द्र सरकार ने नियमित टीकाकरण के भी निर्देश दे दिए हैं।

सीएमओ डॉ.जय सिंह के अनुसार, पोलियो अभियान में डब्ल्यूएचओ की सलाह पर सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों को भी लगाया गया है। डॉक्टर बीमार बच्चाों को पोलियो के हिसाब से परीक्षण कर रहे हैं।

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