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काशी की धरती से ही हो गंगा के लिए जंग

गंगा की अविरलता के लिए गंगा सेवा अभियानम् की ओर से तपस्या जारी है। अन्न व फल त्याग तपस्यारत ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानंद ने गंगा स्नान के साथ ही श्रीमद्भागवत महापुराण के मूल मंत्र के चतुर्थ स्कंद का पाठ किया। वेद विद्यालय के बटुकों ने वेदमंत्रों का पाठ कर वातावरण में आध्यात्मिक आभा बिखेरी। सुबह तपस्थली पर गंगा प्रेमी राजेन्द्र सिंह व प्रेम शंकर उपाध्याय ने एक दिन उपवास का संकल्प लिया।

तपस्या स्थल पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि काशी में गंगा का मान बढ़ जाता है। भोलेनाथ की जटाओं से होते हुए धरा पर उतरी गंगा का महत्व काशी में इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि गंगा यहां उत्तर वाहिनी प्रवाहमान है। ऐसे में गंगा के मुक्ति के लिए होने वाले किसी भी आंदोलन का केन्द्र काशी ही होना चाहिए।

गोष्ठी में प्रधानाचार्य परिषद के उपाध्यक्ष डा. हरेन्द्र राय, काशी हिन्दु विश्व विद्यालय के महंत राजेन्द्र तिवारी, यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी, अरविंद सिंह, पियुष अवस्थी, गिरिश चन्द्र तिवारी आदि ने भाग लिया। संचालन अभियानम् के प्रदेश समन्वयक राकेश चन्द्र पाण्डेय ने किया। संध्याकाल में आध्यात्मिक उत्थान मण्डल की महिलाओं ने सामूहिक मानस पाठ किया। बाल काण्ड का पाठ किया गया।

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