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इनोवेशन की गंगा अब उल्टी बहेगी

प्रबंध जगत में आजकल ‘जुगाड़’, ‘फ्रुगल इंजीनियरिंग’ और ‘रिवर्स इनोवेशन’ पर चर्चाएं गर्म हैं। विजय गोविंदराजन, आर ए माशेलकर और नवी राजू जैसे प्रबंध गुरुओं के अनुसार, विश्व अर्थव्यवस्था का भविष्य इस बात में है कि नए उत्पादों, नईं सेवाओं और नए विचारों की खोज कम से कम खर्चे पर कैसे हो पाती है। ‘जुगाड़’ को लेकर हम भारतीयों में गौरव की अनुभूति होती है, लेकिन ‘जुगाड़’ को इनोवेशन नहीं माना जा सकता।

19वीं व 20वीं सदियों में ज्यादातर नए आविष्कार अमेरिका व यूरोपीय देशों में हुए। रेडियो, कार, बिजली का बल्ब, पेनसिलीन, हवाई जहाज, टीवी़, मोबाइल, इंटरनेट, क्रेडिट कार्ड और एटीएम आदि का आविष्कार विकसित देशों में हुआ। जब ये आविष्कार इन देशों में वाणिज्यिक रूप से सफल हो गए, तो बाद में उन्हें विकासशील देशों के बाजारों में उतारा गया। इनोवेशन की गंगा पिछले 200 वर्षों में विकसित देशों से विकासशील देशों की ओर बहती रही है। अब ऐसा लगता है कि यह भारत व चीन से निकल कर विकसित देशों की ओर बहेगी।

भारतीय मूल के प्रबंधशास्त्रियों ने ‘रिवर्स-इनोवेशन’ और ‘फ्रुगल इंजीनियरिंग’ पर जो अनुसंधान किए हैं, उनका ज्यादा फायदा वे भारतीय कंपनियां उठा सकती हैं, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुकी हैं, जैसे टाटा, आदित्य बिड़ला, महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा, भारती टेलीकॉम आदि। टाटा मोटर्स की ‘नैनो’ कार रिवर्स इनोवेशन और फ्रुगल इंजीनियरिंग का एक अच्छा उदाहरण है।

रिवर्स-इनोवेशन का दूसरा अच्छा उदाहरण डॉ देवी शेट्टी का नारायण हृदयालय बंगलुरु है, जो कि दो हजार डॉलर में ओपन हार्ट सर्जरी करके विश्व स्तर पर धाक जमा चुका है। इसी सर्जरी की अमेरिका में लागत 50 हजार डॉलर आती है। नारायण हृदयालय की ओपन हार्ट सर्जरी अमेरिका के अस्पतालों की गुणवत्ता से कहीं भी पीछे नहीं है। ओपन हार्ट सर्जरी में गुणवत्ता का मूल्यांकन सर्जरी के 30 दिन बाद होने वाली मृत्यु दर से आंका जाता है, जो कि अमेरिका में 1.9 प्रतिशत है। नारायण हृदयालय में यह दर 1.2 प्रतिशत है, जबकि लागत 25 गुना कम है। डॉ देवी शेट्टी के ऑपरेशन की लागत इतनी कम क्यों है, जबकि सर्जरी के 30 दिन बाद होने वाली मृत्यु की दर कम है? दरअसल, अमेरिकी फोर्ड मोटर्स कंपनी ने पिछले 100 वर्षों में प्रबंध जगत में जो सिद्धांत गढ़े व दुनिया की सबसे बेहतरीन कारें बनाईं, उनको डॉ देवी शेट्टी ने ओपन हार्ट सर्जरी में बहुत कल्पनाशील ढंग से उपयोग किया। ये सिद्धांत थे प्रमापीकरण, श्रम विभाजन, असेंबली लाइन उत्पादन और बड़े पैमाने की किफायतें। अगर नारायण हृदयालय, फोर्ड मोटर्स से सीखकर ओपन हार्ट सर्जरी का एक इनोवेटिव और किफायती तरीका ढूंढ़ सकता है, तो अमेरिकी अस्पताल ऐसा क्यों नहीं कर सकते?

रिवर्स-इनोवेशन के प्रबंधकीय विचारों ने विकसित देशों की सरकारों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और प्रबंध संस्थानों को मजबूर कर दिया है कि पिछले 100 वर्षों में विकसित हुए अपने तौर-तरीकों, सोच और लागत की आत्मालोचना करें। सारी दुनिया की नजरें भारत की टाटा मोटर्स, महिन्द्रा, रिलायंस, सुजलोन और चीन की लेनोवो व हॉयर जैसी कंपनियों की ओर हैं। अमेरिका की सुविख्यात कंपनी जीई के सीईओ जैफ्रे इमैल्ट का कहना है, ‘अगर हम गरीब देशों में इनोवेशन करके अपने उत्पादों को दुनिया में नहीं उतारते हैं, तो विकासशील देशों की प्रतियोगी कंपनियां ऐसा जरूर करेंगी।’

विजय गोविंदराजन और क्रिस टिंबल ने मिलकर एक पुस्तक लिखी है- रिवर्स इनोवेशन-क्रियेट फॉर फ्रॉम होम, विन ऐवरीव्हेयर। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू प्रेस से प्रकाशित इस पुस्तक में बताया गया है कि भविष्य में रिवर्स इनोवेशन विश्व अर्थव्यवस्था की निर्णायक शक्ति होगी। लेखकों के अनुसार रिवर्स इनोवेशन का आशय उन क्रांतिकारी आविष्कारों से है, जो कि पहले विकासशील देशों में जन्म लेते हैं और फिर विकसित देशों में ले जाए जाते हैं।

रिवर्स इनोवेशन के द्वारा विकासशील देशों की कोई कंपनी, विकसित देशों की एक विशालकाय कंपनी को कैसे पटकनी लगा सकती है, इसका एक रोचक उदाहरण महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा है। इस कंपनी ने साल 1994 में अमेरिकी किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक छोटे आकार का ट्रैक्टर अमेरिकी बाजार में उतारा था। उस समय अमेरिकी ट्रैक्टर उद्योग में डीरे कंपनी का प्रभुत्व था, जो कि 600 हॉर्स पॉवर तक के भीमकाय ट्रैक्टर बनाती थी। उसके मुकाबले में महिन्द्रा का ट्रैक्टर लाल रंग, छोटे आकार और कम कीमत का था। शुरू में डीरे कंपनी महिन्द्रा के ट्रैक्टर को नजरंदाज करती रही और केस तथा न्यू हॉलैंड को अपना प्रतिद्वंद्वी मानती रही। 1999 और 2006 के मध्य में महिन्द्रा की अमेरिका में बिक्री 40 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ती रही। इसके जवाब में डीरे कंपनी ने अपने ट्रैक्टर भारतीय बाजार में उतारे, किंतु भारतीय किसानों की जरूरतों पर ध्यान दिए बिना ही। डीरे को भारतीय बाजार में नाकामयाबी झेलनी पड़ी। आज महिन्द्रा विश्व में सबसे ज्यादा ट्रैक्टर बेचने वाली कंपनी है, जिसका बहुत कुछ श्रेय रिवर्स इनोवेशन और निरंतर अनुसंधान को दिया जाना चाहिए।

रिवर्स इनोवेशन के क्षेत्र में भारतीय प्रबंध-गुरुओं की पहल कदमी के साथ-साथ भारतीय मूल के सीईओ भी कीर्तिमान बना रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण अमेरिका की कंपनी हारमैन इंटरनेशनल है, जो कि लक्जरी कारों के लिए महंगे स्टीरियो सिस्टम बनाती है। वर्ष 2007 में दिनेश पालीवाल को इसका सीईओ बनाया गया। आगरा के एक स्वाधीनता सेनानी परिवार में जन्मे दिनेश पालीवाल 22 वर्ष तक स्विट्जरलैंड की फर्म एबीबी में उच्च पदों पर काम कर चुके थे। उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कंपनी का कारोबार फैलाने की रणनीति निर्धारित की। 2008 में हारमैन ने चीन और भारत में अपनी इनोवेशन टीम तैनात की और पांच वर्ष बाद पांच अरब डॉलर की बिक्री का लक्ष्य रखा। आज कंपनी की वार्षिक बिक्री 10.9 अरब डॉलर है, जिसमें 40 फीसदी हिस्सा उन नए उत्पादों का है, जिन्हें रिवर्स इनोवेशन से चीन और भारत में विकसित किया गया था।

रिवर्स इनोवेशन कोई अमूर्त फैशनेबल विचार नहीं, जो कि प्रबंध जगत में अक्सर सनसनी पैदा करते हुए देखे जाते है। यह 21वीं सदी की विश्व अर्थव्यवस्था की एक जमीनी हकीकत है। चीन, भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देशों में गरीब और मध्यवर्ग के लोगों की क्रयशक्ति में निरंतर सुधार हो रहा है और एक शक्तिशाली बाजार बन चुका है। विश्वविख्यात प्रबंधशास्त्री दिवंगत सी के प्रहलाद अपनी पुस्तकों द फॉर्चून ऐट द बॉटम ऑफ पिरामिड तथा द फ्यूचर ऑफ कंपिटीशन में विश्व बाजार की धुरी विकासशील देशों की तरफ खिसकने की घोषणा कर चुके थे। विकसित देशों की कोई भी बड़ी कंपनी यदि विकसित देशों के सिकुड़ते बाजार से पैदा होने वाले खतरों से बचना चाहती है, तो उसे शोध को उच्च प्राथमिकता देते हुए रिवर्स इनोवेशन को अपनाना पड़ेगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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