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दूध उत्पादन में वृद्धि के बावजूद सिन्थेटिक दूध बनना जारी

देश में पशुधन, दूध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दूध की खपत में वृद्धि के बावजूद दुखद पहलू है कि सिन्थेटिक दूध के बनाने और बेचने में भी तेजी से इजाफा हुआ है।

जनसंख्या बढ़ने के बावजूद भारत में प्रति व्यक्ति इस समय औसत 260 ग्राम खपत है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह कम से कम 285 ग्राम होनी चाहिए। पंजाब में प्रति व्यक्ति दूध की औसत खपत 90 ग्राम और हरियाणा में 850 ग्राम है।

पूर्वोत्तर राज्यों में यह खपत केवल 10 से 150 ग्राम प्रति व्यक्ति है। केन्द्रीय भैंस अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. आर.के. सेठी ने कहा कि मुर्रा भैंस की नस्ल विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और इसी के कारण भारत दूध उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है।

विश्व का 16.221 प्रतिशत दूध भारत में होता है और दूसरे स्थान पर अमेरिका है। सन 2000 से 2011 तक पशुधन में डेढ़ प्रतिशत वृद्धि हुई है और इसी काल में दूध का लगभग साढे़ चार प्रतिशत उत्पादन बढ़ा।

सिन्थेटिक दूध में यूरिया की मिलावट पकड़ने के लिए एचएयू हिसार ने किट तैयार की हुई है और एक बार में टेस्ट में केवल तीन रुपए खर्च होते हैं। अब इस किट को लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्व विद्यालय तथा कृषि विज्ञान केन्द्र करनाल ने बाजार में भी उपलब्ध करवा दिया है।

डॉ. आर.के. सेठी ने कहा कि दूध में मिलावट करने वालों को सजा दिलाने के लिए जनता को भी जागरूक रहना चाहिए। लोग जहां से भी लोग दूध लेते हैं उन्हें माह में कम से कम एक बार उस दूध की गुणवा की जांच जरूर कर लेनी चाहिए। यदि उनको मिल रहे दूध में यूरिया आदि की मिलावट पाई जाती है तो उन्हें तुरन्त ऐसा दूध बेचने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवानी चाहिए।

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