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कानों की सुनिए

कानों की सुनिए

राजधानी में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण ने कान पर काफी बुरा असर डाला है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में कान के मरीज 40 प्रतिशत तक हैं। इनमें अधिकांश युवा हैं जो कानों में ईयर फोन ठूंसकर बेखौफ लाउड आवाज में संगीत सुनते हैं। इससे उनकी सुनने की क्षमता कम होती जा रही है। मृदुला भारद्वाज का आलेख

आपके कान में भी दर्द होता है या भारीपन या हवा जैसा कुछ भरापन महसूस होता है? आवाज धीमी सुनाई देने लगी है? सरसराहट जैसी या फिर घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है? कान में किसी तरह का दबाव महसूस होता है या कान लाल हो जाता है? उसमें सूजन आ गई है या कान से तरल पदार्थ का बहता है? अगर ऐसा कुछ भी हो रहा है तो थोड़ी-सी भी लापरवाही आपको महंगी पड़ सकती है। आपका एक कान काम करना बंद कर सकता है या आप दोनों कानों से सुनने की क्षमता गंवा सकते हैं।

रश्मि कई दिनों से दाएं कान के दर्द से परेशान थी, लेकिन डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं समझ नहीं रही थी। उसने सोचा कि अपने आप ठीक हो जाएगा। किसी सहेली के कहने पर उसने काम में सरसों का तेल भी डाल लिया और कान से वैक्स (मैल) निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। दर्द और बढ़ता गया और आखिरकार उसे ईएनटी विशेषज्ञ के पास जाना पड़ा। पता चला कि वह कान को अक्सर नुकीली लकड़ी से खुजलाती रहती थी जिस कारण कान में संक्रमण हो गया था। देर करने पर कान को बड़ा नुकसान हो सकता था, लेकिन समय रहते उसका इलाज हो गया।

कान की ऐसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में लगभग 20 से 30 प्रतिशत लोग कान की बीमारी के शिकार हैं। श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के ईएनटी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. जयंत जयसवाल के अनुसार, ‘आजकल महानगर में लोगों की जीवनशैली काफी बदल गई है। हर कोई फोन से लेकर गाड़ी तक की सुविधा जुटाने में लगा है। इससे ध्वनि प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ रहा है और इस प्रदूषण के कारण कान की परेशानियां भी काफी बढ़ी हैं। कान के रोगियों में युवाओं की संख्या ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, जिनकी सुनने की क्षमता में कमी आई है। सिर्फ हमारे हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत कान की समस्याएं लेकर आते हैं। आपको इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

कान में कुछ चला न जाए
कई बार बच्चे खेलते-खेलते छोटी-छोटी वस्तुएं कान में डाल लेते हैं। इन्हें विशेष तरह के औजारों द्वारा निकाला जाता है। अगर वस्तु अधिक अंदर चली गई है तो दूरबीन की सहायता से निकाला जाता है। कई बार सीरिजिंग तकनीक से भी वस्तु को निकाला जाता है। अगर कीड़ा, मच्छर आदि कान में चला गया हो तो कान में तेल की कुछ बूंदे डालने से कीड़ा ऑक्सीजन न मिलने से मर जाता है। ऐसे में उसे आसानी से निकाला जा सकता है।

नुकीली चीज से न छेडें
कान को किसी नुकीली चीज से खुरचने या खुजलाने से कान में संक्रमण हो जाता है। किसी इत्र, क्रीम या दवाई के कारण भी कान में एलर्जी हो सकती है। इससे कान लाल हो जाता है, खुजली होती है और दर्द होता है।

पानी से भी होता है नुकसान
पानी, बारिश या स्विमिंग पूल के पानी के कारण कान की नली में संक्रमण हो जाता है, जिसे ऑटायरीस राक्स्टर्ना कहते हैं। यह आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में होता है। इससे बचने के लिए कान को सूखा रखना चाहिए।

कान से पानी आए तो
कान के कॉर्टीलेज और उसके ऊपर की झिल्ली संक्रमित हो सकती है। इसमें कान लाल व सूजा हुआ दिखता है। कान से पानी जैसा द्रव बहता है। इसमें बहुत दर्द होता है। इसका इलाज तुरंत करवाना चाहिए।

सावधानी से करें सफाई
कान से मैल अपने आप न निकल पाने के कारण अंदर मैल जमा हो जाता है। इस पर तेल, धूल, धुंआ, कचरा आदि लगने से ये कड़क हो जाता है। इसे निकालना बेहद जरूरी होता है। कुछ दवाइयों की मदद से मैल को नर्म करके उसे निकाला जाता है। लेकिन इस मैल को जमने से बचाने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना ईयरबड की मदद से अपने कान की खुद सफाई करें।

ऐसे ठीक रहेंगे कान
कान में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह के पेनकिलर का सेवन न करें।
दर्द होने पर सूती रूमाल को गर्म करके कान पर रखकर कान की सिकाई करें, लाभ होगा।
गला खराब हो तो गर्म पानी के गरारे करने चाहिए। इससे कान दर्द से बचा जा सकता है।
कान का मैल निकालने या कुछ फंस जाने पर उसे निकालने के लिए माचिस की तीली या पिन आदि नुकीली
वस्तु का प्रयोग न करें।
नहाने के तुरंत बाद कानों को अच्छी तरह से पोंछ कर सुखाना चाहिए।
कानों की सफाई मेडिकेटिड ईयरबड से करें।
दर्द से बचने के लिए मीठा या च्यूंगम खाना अच्छा रहता है। 
कई बार कान में सरसराहट या कई तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। इनसे बचने के लिए तिल के तेल से कान के पिछले हिस्से में दिन में दो बार मसाज करें।
कान में कभी भी कोई तेल न डालें।
कान में दर्द होने पर ठंडे पदार्थ के सेवन से बचें।

आसन भी है उपाय
सुनने की क्षमता बरकरार रखने के लिए आसन करना लाभप्रद है। सिंहासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम काफी प्रभावी हैं।

ईयरफोन ने ले ली कान की जान
मेट्रो हो या बस या फिर सड़क पर चलने वाले लोग, आज हर किसी के कानों में ईयरफोन नजर आ जाता है। इसकी दीवानगी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब केवल युवा वर्ग ही नहीं, लगभग हर उम्र का व्यक्ति अपना मनपसंद संगीत सुनने और टाइमपास करने के लिए ईयरफोन का सहारा ले रहा है। लेकिन वे इस बात से अनजान हैं कि ईयरफोन या हेडफोन के प्रति उनकी ये दीवानगी उन्हें बहरेपन की ओर ले जा रही है।

लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने के कारण तेज ध्वनि ईयर ड्रम को क्षति पहुंचाकर उन्हें पतला कर देती है।
बहुत ज्यादा लाउड म्यूजिक सुनने से कानों की रोम कोशिकाएं अस्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। कानों पर इसका प्रभाव नहीं पता चलता, जिससे इनका इलाज नहीं हो पाता और बहरापन स्थायी हो जाता है।
लाउड म्यूजिक सुनने वालों को धीमी आवाजें सुनाई नहीं देतीं। यह सुनने की क्षमता पर तो असर डालती ही है, इससे याददाश्त और बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
लाउड म्यूजिक के कारण कई मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न होती है। जैसे इंसोमेनिया, डिप्रेशन, पल्पिटेशन।
लाउड म्यूजिक और ईयरफोन की वजह से नींद न आना, सिरदर्द, चक्कर आना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

हवाई यात्रा में बरतें सावधानी
हवाई यात्रा के दौरान लोगों को अक्सर कान दर्द की शिकायत होती है। प्लेन लैंडिंग के दौरान लोग ऐसी शिकायतें करते हैं। यह दबाव कान के पर्दे पर भी महसूस होने लगता है जिससे कान दर्द शुरू हो जाता है। इससे बचने के लिए लैंडिंग के वक्त कुछ मीठा या च्यूइंग गम चबाने की सलाह दी जाती है।

स्विमिंग से संक्रमण
स्विमिंग करने वाले लोगों को भी कान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कान दर्द या कान बहने जैसी परेशानियां अधिक होती हैं। इसका कारण है नमी। बहुत देर पानी में रहने या कान में पानी चला जाता है। इससे संक्रमण हो जाता है। इससे बचने के लिए स्विमिंग के दौरान कानों को ईयर प्लग से ढककर रखें।

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