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हृदय रोग बचने का उपाय है आसान

ज्योतिष शास्त्र में बीमारियों को जानने करने का विधान है। जन्मपत्री में ग्रहों की स्थिति तथा गोचर का प्रभाव बीमारी और उसके समाधान के स्पष्ट संकेत देता है। जीवन यापन में सजगता तथा ग्रहों की शांति से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। जानेमाने ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश शर्मा बता रहे हैं हृदय रोग से बचाव के उपाय

हृदय सीने में बायीं तरफ, कालपुरुष कुंडली के चौथे भाव को दर्शाता है। मस्तिष्क भी चौथे भाव का आधिपत्य रखता है। हृदय रोग के निर्धारण में मस्तिष्क की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चन्द्रमा चौथे भाव का कारक ग्रह है। इसकी कमजोर और दूषित अवस्था होने पर हृदय रोग की आशंका बढ़ जाती है। चन्द्रमा की स्वामी राशि कर्क है। कर्क राशि का शुद्ध एवं बलवान अवस्था में होना मस्तिष्क की स्वस्थता का प्रतीक है। साथ ही हृदय रोग की आशंका में कमी लाता है। कर्क राशि की बलवान स्थिति  व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में आशातीत बढ़ोत्तरी करती है।

कालपुरुष कुंडली में हृदय होने का गौरव अनुराधा नक्षत्र को प्राप्त है। इसकी शुद्ध स्थिति हृदय के स्वस्थ होने का संकेत देती है। सूर्य हृदय का मुख्य कारक ग्रह है। इसकी दूषित तथा नीच स्थिति में हृदय रोग होने की प्रबल आशंका रहती है। चूंकि सूर्य का मुख्य स्थान पांचवा भाव है। अत: पांचवें भाव के अधिपति की स्थिति का अवलोकन करना जरूरी है। चतुर्थ भाव तथा पंचम भाव और इनके स्वामी की स्थिति हृदय रोग के प्रकट होने के समय का स्पष्ट संकेत देती है। ज्योतिषीय उपाय करके हृदय रोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है या आप इस रोग से मुक्ति भी पा सकते हैं।

हृदय रोग से बचने के उपाय
बेलपत्र की जड़ रेशमी कपड़े में बांधकर रविवार को सूर्योदय के समय सूर्य मंत्र का जाप करते हुए दाहिनी भुजा में धारण करें।
मंत्र: गायत्री मंत्र का जाप करें
दान: सूर्य को नियमित जल, रोली का अर्ध्य करें।

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