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अजय ने मशरूम की खेती कर बदली अपनी किस्मत

हजारीबाग नीलेंदु जयपुरियार। गर्मी के मौसम में जब धरती आग उगल रही है, पानी की कमी के कारण खेती-बाड़ी भी मुश्किल है, ऐसे में हरी सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। यह सब देखते हुए हजारीबाग के बड़ा डाकघर मार्ग निवासी अजय कुमार ने मशरूम की खेती करके इसका जो हल निकाला, उससे उनकी समस्या तो दूर हो ही गई, साथ ही उन्होंने अपनी किस्मत भी बदल ली।

तीसरा लाभ यह हुआ कि वह अपने पड़ोसियों और नाते-रिश्तेदारों को भी मुफ्त में मशरूम खिला रहे हैं।अजय ने शौकिया तौर पर मशरूम की खेती शुरू की। वह बताते हैं कि एक दिन बैठे-बैठे अचानक ध्यान आया कि सब्जी के विकल्प के रूप में कुछ उगाया जाए। बहुत से विचार आए, लेकिन मशरूम अच्छा लगा। जमीन थी नहीं, सो एक छोटे से कमरे में ही उन्होंने मशरूम की खेती शुरू कर दी।

पहले दिन करीब 10 किलो मशरूम टूटा। उसे लेकर बाजार पहुंचे, तो पूरा माल एक सौ रुपए किलो की दर से थोड़ी ही देर में बिक गया। ग्राहक भी मशरूम की सस्ती कीमत से खुश हुए। अजय को रास्ता मिल गया। फिर उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र हॉलीक्रॉस के वैज्ञानिक डॉ दुष्यंत राघव से संपर्क किया और मशरूम की खेती की पूरी पद्धति की जानकारी ली।

फिर सोचा कि प्रयोग करने में हर्ज क्या है। घर के सबसे ऊपर स्थित स्टोर रूम में मशरूम के लिए कई पैकेट तैयार कर लिए। 25 दिन पूर्व तीन किलो मशरूम का बीज खरीदा। एक माह बाद अब मशरूम का उत्पादन होरहा है। अजय कहते हैं, यह धंधा इतना मुनाफा वाला है, सोचा नहीं था। अब वह बड़े स्तर पर इसकी खेती करेंगे।

उन्होंने एक क्विंटल मशरूम उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 1500 रुपए बीज पर खर्च आएंगे। उन्होंने बताया कि एक किलो बीज 60 रुपए में आता है। बकौल अजय, मशरूम की खेती के लिए जमीन की जरूरत नहीं होती। कमरे में भी इसकी खेती की जा सकती है। कमरे में मिट्टी नहीं चाहिए। सिर्फ कुट्टी और पॉलिथीन चाहिए। उसकी मदद से खेती होगी। फसल को मामूली पानी चाहिए, जिसका छिड़काव सुबह- शाम जरूरी है।

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