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4000 करोड़ का लिंकेज घपला

रांची राणा गौतम। कोल लिंकेज के नाम पर झारखंड में चार हजार करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। कोल लिंकेज की जांच कर रही सीबीआई की शुरुआती जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की रकम बढ़ सकती है। घोटालेबाजों में बड़े-बड़े कोयला माफिया शामिल हैं।

सीबीआई ने बीते दिनों कोल लिंकेज मामलों की जांच को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी।

कैसे हुआ घोटाला- कोयला कारोबार से जुड़ी कई कंपनियां स्पेशल स्मोकलेस फ्यूल बनाने के लिए नोटिफाइड दर से कोयला खरीदती हैं। कोल इंडिया लिमिटेड दो तरह से कोयले की बिक्री करती है। पहला नोटिफाइड दर और दूसरा ई-ऑक्शन के माध्यम से।

उन कंपनियों को कोल लिंकेज मिलता है, जिनके पास स्पेशल स्मोकलेस फ्यूल बनाने के प्लांट हैं। कंपनी की क्षमता के आधार पर कोल लिंकेज मिलता है जिसमें नोटिफाइड दर पर कोयले की आपूर्ति की जाती है। ज्यादा कोयला लेकर इसे खुले बाजार में बेच दिया गया है।

ऐसे होता है घोटालाः यदि किसी कंपनी की दो लाख टन क्षमता है तो वह कोल इंडिया में अपनी पहुंच तथा पैरवी के बल पर पांच लाख टन का कोल लिंकेज ले लेती है। शेष बचे तीन लाख टन को खुले बाजार में बेच दिया जाता है। कई ऐसी भी कंपनियां हैं, जिनके पास अपने प्लांट तक नहीं है, मगर उन्हें भी कोल लिंकेज मिले हुए हैं।

क्या है नोटिफाइड दरः कोयले का नोटिफाइड दर दो हजार रुपये प्रति टन है। वहीं ई-आक्शन के माध्यम से कोयले की नीलामी छह हजार रुपये प्रति टन से शुरू की जाती है। जिन कंपनियों को कोल लिंकेज मिलता है, उन्हें दो हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से कोयला आपूर्ति होती है।

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