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क्रांति के वाहक भी कलाकार भी!

अई एक चीनी कलाकार हैं, लेकिन उनकी कला की शोहरत चीन से बाहर भी खूब है। बीजिंग ओलम्पिक का मुख्य स्टेडियम भी उन्होंने ही डिजाइन किया था, लेकिन आज लोग उन्हें बतौर क्रांतिकारी जान रहे हैं। उन्होंने चीन में सरकार के खिलाफ विरोध का मोर्चा खोला है, जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा है।

चीन में सत्ता के प्रति विरोध के स्वर शायद ही सुनाई देते हों। दूसरे शब्दों में कहें तो वहां का शासक वर्ग विरोध का स्वर सुनने का आदी नहीं है। पूरी दुनिया में आजादी के एक नए माध्यम के रूप में उभरा इंटरनेट भी वहां आजाद नहीं है। तरह-तरह के बहानों से उस पर तरह-तरह की बंदिशें थोप दी जाती हैं। जाहिर है, सत्ता के प्रति मुखरता वहां एक अक्षम्य दुस्साहस जैसा है, चाहे वह  किसी भी रूप में हो, किसी भी माध्यम से हो। जब किसी ने ऐसी हिमाकत की, उसके रास्ते दुश्वार होते गए। फिर भी वहां ऐसा दुस्साहस करने वाले पैदा हो ही जाते हैं। ऐसे ही लोगों में एक महत्त्वपूर्ण नाम है अई वेईवेई (जन्म 18 मई 1957) , जो कलाकार भी हैं और ब्लॉगर भी। इन दिनों भारत में उनकी कला की प्रदर्शनी मुंबई में चल रही है, जो 22 अप्रैल को समाप्त होगी। यह पहली बार है, जब उनका काम भारत में प्रदर्शित हो रहा है। आज वह कनटेम्परेरी चीनी आर्ट और एक्टिविज्म का चेहरा बन चुके हैं और इसकी एक बहुत बड़ी वजह है इंटरनेट। अई के अनुसार इंटरनेट ने उन्हें अपनी आवाज को दूर तक ले जाने और उसे मजबूत बनाने में मदद की है।

अई को जितना प्यार आजादी की भावना से है, उतना ही आर्ट से भी। दोनों के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। बीजिंग ओलम्पिक का मुख्य स्टेडियम नेस्ट उन्होंने ही डिजाइन किया था। हलांकि यह थोड़ा विरोधाभासी लगता है कि जिस सत्ता का वह मुखर विरोध करते हैं, उसी के कहने पर उन्होंने इस बेहद खूबसूरत विश्वस्तरीय स्टेडियम का डिजाइन तैयार किया। लेकिन अई का स्पष्ट कहना था कि यह उन्होंने सिर्फ इसीलिए किया कि उन्हें डिजाइनिंग से प्यार है, इसलिए नहीं किया कि उन्हें मंदारिनों के साथ किसी तरह की सहमति या सहानुभूति है।

पिछले साल ‘आर्ट रिव्यू’ मैगजीन द्वारा 100 सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में पहले पायदान पर रखे गए अई इंटरनेट की ताकत की बात करते हैं, वैचारिक स्वतंत्रता की वकालत करते हैं, व्यक्तिगत आजादी की बात करते हैं, चीन के सत्ताधारी वर्ग की असहिष्णुता के खिलाफ जोर-जोर से बातें करते हैं। वह कहते हैं कि अगर आप चीन की सत्ता के खिलाफ बातें करते हैं तो आपको आधी रात को घर में घुस कर पकड़ा जा सकता है। आपको पूछताछ के लिए किसी खुफिया जगह पर ले जाया जा सकता है और आपके परिवार को धमाकाया जा सकता है। यह अस्वाभाविक नहीं है कि चीन में ऐसी बातें करने वालों को उसकी कीमत चुकानी पड़ी है। अई को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। पिछले साल उन्हें 81 दिनों तक पुलिस की गिरफ्त में रहना पड़ा। राजनीतिक आलोचकों और उन जैसे कार्यकर्ताओं पर सरकार द्वारा निगरानी रखे जाने के खिलाफ कुछ हफ्तों पहले ही उन्होंने सत्ताधीशों की आलोचना का एक और मोर्चा खोल दिया, अपनी वेबसाइट वेईवेईडॉटकॉम की शुरुआत कर। हालांकि इसमें उन्होंने अपने आर्ट के जरिये सांकेतिक रूप से अपनी बात कहने की कोशिश की थी, लेकिन यह शासक वर्ग को नागवार गुजरा और ताज्जुब की बात नहीं कि दो दिन में ही उनकी वेबसाइट ‘ब्लॉक’ हो गई।

इसीलिए वह कहते हैं कि चीन खुला है, लेकिन यह खुलापन बाजार का खुलापन है, विचार का खुलापन नहीं है। चीन सरकार ने इंटरनेट के बड़े मंचों- फेसबुक, ट्विटर सभी पर रोक लगा दी है, क्योंकि वह खुली चर्चा से डरती है। अई कहते हैं कि खुलापन और पारदर्शिता ही वह तरीका है, जिससे गलत तरह की ताकतों पर रोक लगाई जा सकती है। हो सकता है कि मुंबई में जो उनकी कला की प्रदर्शनी लगी हुई है, उसके जरिये भारतीयों को चीन की आंतरिक स्थिति, उनकी कला और उनके विचारों को ज्यादा नजदीकी और गहराई से समझने का मौका मिले।

 

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