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कट्टरता की नई रवायतें गढ़ता पाकिस्तान

परमात्मा को उसके बंदे किस नाम से पुकारें, क्या यह वाकई महत्वपूर्ण है? यह सवाल पाकिस्तानी शिष्टाचार में हो रहे एक अनोखे बदलाव से पैदा हुआ है। लगभग दस वर्ष पहले तक एक-दूसरे से विदा लेते समय पाकिस्तान के लोग आम तौर पर ‘खुदा हाफिज’ लफ्ज का इस्तेमाल करते थे, जिसका मतलब है, ‘खुदा आपकी हिफाजत करें।’ लेकिन पिछले दशक में वहां ‘खुदा हाफिज’ की जगह ‘अल्लाह हाफिज’ का इस्तेमाल शुरू हुआ और अब तो मजहबी रहनुमा से लेकर फैशन जगत के मॉडल व शीर्ष पाकिस्तानी टीवी एंकर तक, सभी ‘अल्लाह हाफिज’ कहने लगे हैं।

इसमें कोई दोराय नहीं कि वक्त के साथ-साथ हमारी जबान भी बदलती व विकसित होती है, पर इस बदलाव ने पाकिस्तान के तरक्कीपसंद लोगों को बेचैन कर दिया है। उनका कहना है कि यह मुल्क के सांस्कृतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव को दिखाता है। ‘खुदा’ शब्द ‘अल्लाह’ का उर्दू तर्जुमा है, जो फारसी से लिया गया है। फिर भी, कई लोग यह दलील देने लगे हैं कि ‘खुदा’ शब्द किसी के भी परमात्मा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, पर ‘अल्लाह’ सिर्फ कुरान में वर्णित अल्लाह से बाबस्ता है। कुछ लोग तो यह तक दावा करने लगे हैं कि ‘खुदा’ शब्द बुतपरस्ती से जुड़ा है।

‘अल्लाह हाफिज’ को बढ़ावा देने की शुरुआत सबसे पहले 1980 के दशक में हुई। तब पाकिस्तान में जनरल जिया की हुकूमत थी और अफगानिस्तान में तत्कालीन सोवियत संघ की मौजूदगी के खिलाफ अमेरिका व सऊदी अरब के जेहाद में पाकिस्तान भी शामिल था। बहरहाल, ‘खुदा’ शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ जो दलील कुछ मुसलमान पेश कर रहे हैं, वह उन अमेरिकी ईसाइयों के तर्क की तरह है, जो कहते हैं कि अल्लाह हमारे ‘गॉड’ से अलग हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि ईश्वर के रूप के सवाल पर ईसाइयत, इस्लाम व अन्य मजहबों में फर्क है, पर विभिन्न मजहबों के लोग अपनी-अपनी इबादतों में किसी एक नाम का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते?

कुछ साल पहले नीदरलैंड के रोमन कैथलिक बिशप टिनी मस्केन्स ने कहा था: ‘गॉड के लिए अल्लाह शब्द का इस्तेमाल बहुत खूबसूरत है। क्या हम सभी को यह नहीं कहना चाहिए कि अब से हम गॉड को अल्लाह के नाम से संबोधित करेंगे? हम गॉड को किस नाम से पुकारते हैं, क्या इससे उसे कोई फर्क पड़ता है? यह हमारी समस्या है।’ अंग्रेजीभाषी मुसलमानों को ‘अल्लाह’ के लिए गॉड शब्द के इस्तेमाल में कोई हिचक महसूस नहीं होती। अरब देशों में रहने वाले लाखों ईसाई गॉड के लिए अल्लाह शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ‘अल्लाह’ अरबी भाषा का शब्द है, पर अरब के लोग ‘अल्लाह हाफिज’ का नहीं, बल्कि ‘मस्सलाम’ या ‘अल्लाह यलहसलाम’ का इस्तेमाल करते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 
साभार : द गाजिर्यन

 

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