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कटौती और सुनामी

पिछले हफ्ते हिंद महासागर में भूकंप आया। लेकिन इंडोनेशियाई लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया सात साल पहले की तुलना में काफी अलग दिखी। उन्होंने सुनामी की आशंका को देखते हुए तटीय इलाके खाली किए। हालांकि सुयोग से आबादी को लीलने वाली लहरें नहीं उठीं। फिर भी, वहां के लोगों ने जो कदम उठाए, वे स्वागत के योग्य हैं। साल 2000 में आए भूकंप और सुनामी में दक्षिण-पूर्व एशिया की करीब दो लाख जिंदगियां खत्म हो गईं। दरअसल, उस वक्त अधिकतर लोगों को इस विनाश लीला की तनिक भी जानकारी नहीं थी। लेकिन उस कुदरती आपदा से सबक लेते हुए हिंद महासागर सुनामी चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई, जिसके नतीजे इस बार सकारात्मक आए। हैरत की बात यह है कि इन आपदाओं को देखते हुए भी राष्ट्रपति बराक ओबामा सुनामी चेतावनी प्रणाली में आर्थिक कटौती के पक्षधर हैं। हालांकि, कम कटौती के दो प्रस्ताव हैं, पर इनसे नुकसान कहीं अधिक है। नेशनल ओसेनिक ऐंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तावित बजट में बराक ओबामा राष्ट्रीय सुनामी आपदा प्रबंधन कार्यक्रम की राशि में 3.5 मिलियन डॉलर कम करना चाहते हैं। यानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और बचाव योजनाओं के मद से राशि घटाने की योजना है। एक मिलियन डॉलर की कटौती का एक अन्य प्रस्ताव है। ओबामा प्रशासन मैक्सिको की खाड़ी, प्रशांत महासागर व अटलांटिक में लगाए गए ज्वार-भाटा मापक यंत्रों की कार्यप्रणाली को कम करना चाहता है। इनमें से ज्यादातर उपकरण अरसे से मरम्मत के मोहताज हैं। इन प्रस्तावों से सुनामी आपदा प्रबंधन की 72 फीसदी क्षमता घटेगी। मार्च 2011 में आई सुनामी ने जापान में भयंकर तबाही मचाई थी, जिसमें हजारों लोग मारे गए। लेकिन सच यह भी है कि जापान की सुनामी चेतावनी प्रणाली की वजह से ही हजारों जिंदगियां बच भी गईं। वैसे, अमेरिका का हवाई इलाका सुनामी त्रसदियों से अभिशप्त है। 1946 और1960 में यहां तबाही मची थी। कैलिफोर्निया के उत्तरी किनारे ने समुद्री तूफानों को कई बार ङोला है। ऐसे में, देश के तटीय इलाकों की सुरक्षा से जुड़ी प्रणाली में कमी करने वाले मामूली बचत के ये प्रस्ताव मूर्खतापूर्ण हैं।
लॉस एंजिलिस टाइम्स, अमेरिका

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