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विज्ञान का दूसरा पहलू

विज्ञान ने जहां मनुष्य को आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त जीवन दिया है, वहीं हमारी जिंदगी को खतरे में भी डाला है। इसी ने हमें विध्वंसक हथियार मसलन, बंदूक से लेकर हाइड्रोजन बम और परमाणु बम दिए। हालांकि सच यही है कि वैज्ञानिक सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करके हमने खुद संहार के इन साधनों को तैयार किया है। यानी हम हिरोशिमा और नागासाकी जैसे विध्वंस के लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं। क्या यह मुमकिन नहीं है कि हम न्यूटन की तरह सोचते और प्रकृति के गूढ़ रहस्यों को समझते न कि हथियारों के पहाड़ खड़ा करते? इस बारे में सोचने का वक्त आ गया है। अगर हम चाहें, तो विज्ञान को वरदान बना सकते हैं और अभिशाप भी।
दिव्या रावत गर्ग, बाड़मेर, राजस्थान

हरियाली पर संकट
खेती-किसानी के लिए ज्यादा से ज्यादा जमीन चाहिए, इसलिए हमलोगों ने काफी पेड़-पौधे काट डाले। इसके बाद इमारती लकड़ियों की बढ़ती मांग के चक्कर में हमने वनों की अंधाधुंध कटाई की। बेतहाशा बढ़ती आबादी से वन्य क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा है। ऊपर से जलवायु परिवर्तन की वजह से कई पेड़-पौधे नष्ट हो गए। एक तरह से हम कह सकते हैं कि अब हमारा वन्य क्षेत्र खतरे में है। मौजूदा वक्त में झाऊ, ढाक, आख, सुखदर्शन, शीशम जैसे कई पेड़-पौधों की संख्या कम होती जा रही है। इसका असर हमारे जन-जीवन पर भी पड़ने लगा है। वातावरण का तापमान यूं ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि घटती हरियाली इसकी सबसे बड़ी वजह है। अब सरकारों और आम नागरिकों से यही अनुरोध है कि वह दोबारा पेड़-पौधे लगाएं, ताकि चारों ओर हरियाली फैले और अच्छी वर्षा हो।
साक्षी सोलंकी, बी-3/36, यमुना विहार, दिल्ली

इंसाफ की आस
पिछले दिनों प्रकाशित ‘सुस्त इंसाफ’ शीर्षक संपादकीय पढ़ा। यह सच है कि देर से इंसाफ मिलने का मतलब है कि इंसाफ का नहीं मिलना। इस तरह से देखें, तो गुजरात दंगे में मारे गए लोगों के परिवारवालों को अब तक इंसाफ नहीं मिला है, जबकि दंगे के दस साल गुजर गए हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि इस तरह के दंगों के सूत्रधार कुछ राजनेता, नौकरशाह और अराजक तत्व होते हैं, जो यही चाहते हैं कि ऐसे मामले को यूं ही लटकाया जाए, ताकि न्याय की आस करने वाले इस जहान से ही विदा हो जाएं। साफ तौर पर भारत में न्याय पाने की गति काफी धीमी है, जो सचमुच चिंता का विषय है। हालांकि हमारी न्यायिक व्यवस्था इतनी मजबूत जरूर है कि वह दोषियों को नहीं छोड़ती है। फिर भी न्यायिक प्रक्रिया में लेट-लतीफी ठीक नहीं है। न्यायिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों को यह समझना होगा।
इंद्र सिंह धिगान, रेडियो कॉलोनी, किंग्जवे कैंप, दिल्ली

युवाओं के कलाम
पिछले दिनों भारत के पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि युवाओं के बल पर ही विजन 2020 पूरा होगा। डॉ कलाम की यह सोच युवाओं को उत्साहित करती है, वरना भ्रष्टाचार के इस दौर में युवा व्यवस्था से बुरी तरह ऊब गए हैं। उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है और जब भी डॉ कलाम को मौका मिलता है, वह गाइड की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ही देश में मिसाइल कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। विज्ञान के क्षेत्र में उनकी रुचि को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं चलाई थीं। यहां तक कि भारत को परमाणु शक्ति बनाने में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही है। उम्मीद है कि हमारे देश के नौजवान डॉ कलाम के बताए रास्तों पर चलते रहेंगे।
संजीव शर्मा, बी ए-57, शालीमार बाग (पश्चिमी), दिल्ली

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