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30 दिन में ब्योरा नहीं दिया तो सदस्यता खत्म

पंचायत एवं नगरपालिका चुनाव में खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले जनप्रतिनिधियों पर गाज गिरेगी। चुनाव जीतने के 30 दिनों के अंदर खर्च का ब्योरा नहीं देनेवाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही अगले तीन साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लग जाएगा।


30 हजार जनप्रतिनिधियों की सदस्यता पर संकट
2010 में पंचायत चुनाव जीतने के बाद अब तक 30 हजार से अधिक जनप्रतिनिधियों ने खर्च का ब्योरा नहीं दिया है। ऐसे जनप्रतिनिधियों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इनसे अंतिम शो कॉज पूछने की तैयारी में है। इसके बाद सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। आयोग के अनुसार खर्च के ब्योरे को लेकर कई बार निर्देश दिए गए हैं।


नौ जिलों के प्रत्याशी रेड जोन में खर्च का ब्योरा नहीं देनेवाले जनप्रतिनिधियों की अधिक संख्या चतरा, कोडरमा, गोड्डा, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, रांची, सिमडेगा और पूर्वी सिहंभूम में है। इन जिलों के एक भी ग्राम पंचायत सदस्यों का ब्योरा अब तक निर्वाचन आयोग को नहीं मिला है। इसी प्रकार मुखिया में चतरा, कोडरमा, गोड्डा, दुमका, जामताड़ा धनबाद, रांची सिमडेगा और पूर्वी सिंहभूम जिला शामिल है।
उम्मीदवार के खर्च का अधिकार
पंचायत चुनाव
ग्राम पंचायत सदस्य 5000रुपये
मुखिया  30,000 रुपये
पंचायत समिति सदस्य 30,000 रुपये
जिला परिषद सदस्य 75,000रुपये
  
नगर निकाय चुनाव
नगर निगम
मेयर/अध्यक्ष   पांच लाख रुपये
डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष पांच लाख रुपये
पार्षद   150,000रुपये  
नगर पर्षद
मेयर/अध्यक्ष   तीन लाख रुपये
डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष तीन लाख रुपये
पार्षद   100,000रुपये
नगर पंचायत
मेयर/अध्यक्ष   दो लाख रुपये
डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष दो लाख रुपये
पार्षद   50,000रुपये

बार-बार रिमाइंडर के बाद भी 2010 के चुनाव के खर्च का ब्योरा नहीं मिला है। इस कारण अगली बार से 30 दिन का समय निर्धारित रहेगा। इस अवधि में ब्योरा नहीं देनेवाले उम्मीदवार को डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा-एसडी शर्मा, आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग

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