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जुदाई से पहले फांसी पर झूला प्रेमी युगल

गोविन्द नगर के इंडस्ट्रीयल एरिया में जुदाई से पहले प्रेमी युगल ने फांसी लगा ली। दोनों का शव टिनशेड की बल्ली से एक ही साड़ी के दोनों किनारों के सहारे लटका मिला। युवक एक सप्ताह पहले चार बच्चाों की मां को रुद्रपुर (उत्तरांचल) से भगाकर शहर लाया था। महिला के पति और परिजनों के आने पर दोनों ने अलग होने के डर से यह कदम उठाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 

मूलरूप से पीलीभीत के चंदी हजारा बंगाली कॉलोनी निवासी इंद्रजीत रुद्रपुर में सब्जी का कारोबार करता है। 14 साल पहले उसकी शादी ढक्का चाट निवासी संतोष की बेटी सुशीला (32) से हुई थी। उसके चार बच्चाे बेटा अशित और बेटी पार्वती, दिया व तीन माह की मासूम किरन हैं।

इंद्रजीत ने बताया कि रूद्रपुर में उसके पड़ोस में मनोज अधिकारी (18) रहता था। पड़ोसी होने के कारण घर पर आने-जाने के दौरान ही उसका पत्नी सुशीला से प्रेम-प्रसंग हो गया। शक होने पर उन्होंने मनोज के घर आने पर रोक लगा दी। इसी बात पर दोनों ने भागने का फैसला कर लिया। एक अप्रैल को मनोज नौकरी का बहाना करके शहर आया। उसने दादानगर इंडस्ट्रीयल एरिया में मिश्रीलाल के मकान में किराए पर कमरा लिया। इसके बाद 5 अप्रैल को फिर रूद्रपुर पहुंचा। 9 अप्रैल को वह सुशीला और उसकी दो बेटियों दीया व किरन को लेकर शहर आ गया। अचानक पत्नी और बेटियों के लापता होने पर उसका शक और पक्का हो गया। वह मनोज की जानकारी करने घर पहुंचा तो पता चला कि वह भी नहीं है। 14 तारीख को  वह साले सुशांत के साथ तलाश करते हुए विद्यार्थी मार्केट निवासी मनोज के मामा खोखन के पास पहुंचे। उन्होंने दोनों के शहर में होने की जानकारी दी। सोमवार को वह सुशीला को साथ ले जाने के लिए ससुर संतोष और साली सुजाता के साथ शहर आया था। ससुर और साली ने दोनों से मिलकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह जाने को तैयार नहीं थी। रात 11 बजे वह भी मिलने पहुंचा, लेकिन दरवाजा नहीं खुलने पर लौट गया था। मंगलवार सुबह जानकारी मिली कि दोनों ने फांसी लगा ली, जिससे उनके होश उड़ गए।

गोविन्दनगर इंस्पेक्टर जेके सिंह का कहना है कि पति और परिजनों के आ जाने से दोनों को अलग होने का डर था। इसी कारण दोनों ने फांसी लगा ली।
 
मासूम के रोने पर पता चला
कानपुर। दादानगर में बच्चों के साथ दोनों एक छोटे से कमरे में रह रहे थे। बगल के कमरे में रहने वाली रंजनी ने बताया कि मंगलवार सुबह सुशीला की बेटी किरन की रोने की आवाज उन्हें सुनाई पड़ी। पहले तो उन्होंने गौर नहीं किया, लेकिन काफी देर उसके चुप नहीं होने पर वह कमरे की तरफ गईं। दरवाजा खुला था। किरन रो रही थी और दिया सो रही थी। वह उसे लेकर दोनों की तलाश करते हुए ऊपर पहुंची तो दोनों के शव लटकते देख चीख निकल पड़ी। उन्होंने भागकर मकान मालिक मिश्री लाल को सूचना दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस को बुलाया।

खाना भी नहीं खाया था
कानपुर। कमरे में रखा खाना साफ बयां कर रहा था कि रातभर उलझन में दोनों ने रोटी का निवाला भी नहीं तोड़ा था। रोटी और दाल बर्तनों में जस के तस रखे थे। ऐसा लगता है कि मंगलवार की सुबह परिजनों का सामना करने के लिए सोचते रहे और जब कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया तो तड़के दोनों ने ऊपर के कमरे में जाकर फांसी लगा ली।

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