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आए थे स्टेडियम को बहुत कुछ देने, बैगन ने खेल बिगाड़ा

खेल मंत्री कामेश्वर उपाध्याय रीजनल स्टेडियम में बहुत कुछ देने का मन बनाकर पहुंचे थे मगर एक हफ्ता पुराने बैगन ने खेल बिगाड़ दिया। बैगन देखकर खेल मंत्री का मूड ऐसा बिगड़ा कि वह एक्शन में आ गए। उन्होंने क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी और बाबू को सस्पेंड कर दिया। करीब एक घण्टे तक के औचक निरीक्षण में खेल मंत्री के चेहरे की रंगत कई बार बदली। जैसे-जैसे खामियां उनके सामने आती रहीं, वह गुस्से से लाल-पीले होते रहे। आखिर में मंत्री ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कह ही दिया-‘मैं यहां बहुत कुछ देने आया था मगर यहां बदइंतजामी देखकर मेरा मूड खराब हो गया।’
मंत्री और उनके साथ चल रही टीम को अचरज इस बात का था कि शनिवार को स्पोर्ट्स कॉलेज के निरीक्षण के दौरान ही खेल मंत्री ने कह दिया था कि वह कभी भी रीजनल स्टेडियम जा सकते हैं। तीन दिन का वक्त तैयारी के लिए पर्याप्त होता है मगर यहां कोई इंतजाम नहीं किया गया था। खास बात यह रही कि रीजनल स्टेडियम को यह पता था कि स्पोर्ट्स कॉलेज में मंत्री ने मेस में खाने की गुणवत्ता और सफाई पर ज्यादा जोर दिया था इसके बाद भी स्टेडियम प्रशासन ने इन बिन्दुओं पर ध्यान नहीं दिया।  
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रोज खरीदो सब्जियां
मेस के निरीक्षण के दौरान सब्जियों की स्थिति देख खेल मंत्री की त्योरी चढ़ गई। सामने पड़ी सब्जियां खाने लायक नहीं थी। उन्हें बताया गया कि एक हफ्ते की सब्जी एक ही बार में खरीद कर आती है। उसे फ्रिज में रख दिया जाता है। उन्होंने हरी सब्जियों की खरीदारी हर दिन करने का निर्देश दिया। छात्रवास के वार्डेन को बुलाकर खाने के बारे में जानकारी ली और मानक के अनुरूप भोजन देने का निर्देश दिया।
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निर्माण कार्य में खामियां, काम बंद करने का निर्देश
-समय से कार्य पूरा न होने पर जेल
गोरखपुर। खेल मंत्री स्टेडियम में हो रहे निमार्ण कार्यो को देखकर चकित रह गए। उन्होंने ठेकेदार को बुलाकर निर्माण कार्यो की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि छह महीने से कार्य हो रहा है लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। निरीक्षण के दौरान पता चला कि बाउंड्रीवाल में पुरानी ईंट का प्रयोग हुआ है। मरम्मत का कार्य अभी पूरा ही नहीं हुआ और मरम्मत हुई दीवालों के प्लास्टर उजड़ने लगे। उन्होंने अधिकारियों को काम बंद कराने का निर्देश दिया।
खेल मंत्री कामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि जो भी कार्यदायी संस्था समय से कार्य पूरा नहीं करेगी तो उसके जिम्मेदार अधिकारी को जेल भेजा जाएगा। मानक के विपरीत कार्य कराने पर सूद समेत रिकवरी की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समय से प्रस्ताव भेजो हर काम होगा।
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आरएसओ का चार्ज देवरिया के डीएसओ को
गोरखपुर। रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम की दयनीय स्थिति को देखते हुए खेल मंत्री ने क्षेत्रीय क्रीडा अधिकारी (आरएसओ) निशा मिश्र को सस्पेंड करते हुए देवरिया के क्रीडा अधिकारी आरपी सिंह को चार्ज देने का निर्देश दिया। खेल मंत्री ने प्रमुख सचिव को निर्देशित किया कि विशेष सचिव और डायरेक्टर के नेतृत्व में तीन दिन के अंदर टीम गठित कर यहां के लेखाजोखा और निर्माण कार्यो की जांच कराकर एक हफ्ते में रिपोर्ट दें।
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हिसाब-किताब का जवाब नहीं दे सके बाबू
गोरखपुर। स्टेडियम की अव्यवस्था और निर्माण कार्यो की दयनीय स्थिति देख खेल मंत्री ने मौके पर मौजूद लेखाकार शिव प्रसाद से सालभर का लेखाजोखा मांगा। लेखाकार ने बताया कि भोजन के लिए 10 लाख रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था। इसके अलावा 3.85 लाख रुपए अनुरक्षण (ग्राउंड में मिट्टी और रंगाई-पुताई) के लिए मिला था। यह कार्य पूरा हो गया है। मंत्री के पूछने पर कि इस समय कितना धन मौजूद है, तो उसने कैश से रकम लाकर मंत्री को दिखाया। मंत्री ने भोजन पर हुए खर्च की जानकारी चाही, जिसे वह नहीं बता पाया। इसके बाद कुछ और जानकारियों का लेखाकार जवाब नहीं दे सके। खफा खेल मंत्री ने लेखाकार को सस्पेंड कर दिया।
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‘कबाड़ी की बिल्डिंग लग रहा है स्टेडियम’ 
गोरखपुर। खेल मंत्री मंगलवार को अपराह्न् दो बजे रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में दाखिल हुए। मुख्यद्वार से ठीक 10 मीटर दूर जाने के बाद उनकी गाड़ी रुक गई। गाड़ी के दाहिने साइड का दरवाजा खुला और खेल मंत्री बाहर निकले।
वह वहां सीधे स्टेडियम के अंदर बने मेस में पहुंचे। मेस में बने हुए भोजन को देखा। मेस में लगे टेबल की स्थित ठीक नहीं थी। मेस में गंदगी भी फैली हुई थी। वहां से वह स्टेडियम के पुराने भवन में पहुंच गए। वहां की स्थिति सबसे बुरी थी। मंत्री ने कहा कि लगता है वह किसी कबाड़ी की बिल्डिंग में आ गए हैं। यह स्पोर्ट्स स्टेडियम कतई नहीं लग  रहा है। कबाड़ी की दुकान नजर आ रहा है। अन्दर और बाहर हर जगह कबाड़ फैला हुआ है।
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स्वीमिंग पुल देखने नहीं गए खेल मंत्री
गोरखपुर। रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने स्वीमिंग पुल की खराब हालत के बारे में खेल मंत्री को बताया गया और उनसे कई बार अनुरोध किया गया कि वह वहां चलकर हालात देख लें। स्वीमिंग पुल में कचरा फेंका जा रहा है मगर खेल मंत्री वहां नहीं गए।
राष्ट्रीय तैराक बच्चान त्रिपाठी ने बताया कि स्वीमिंग पुल के बारे में उन्होंने खेल मंत्री को पत्रक सौंपा और उनसे अनुरोध भी किया। उनकी दिली इच्छा थी कि मंत्री वहां के हालात जाकर खुद देखें। उधर, इस बारे में खेल मंत्री ने बताया कि स्वीमिंग पुल, अच्छा जिम और बैडमिंटन हाल के निर्माण के बारे में प्रस्ताव भेजने को कहा है ताकि वह कुछ कर सकें।
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इस बार सस्पेंड होने से बचे प्रिन्सिपल
गोरखपुर। शनिवार को औचक निरीक्षण में खामियां मिलने पर खेल मंत्री कामेश्वर उपाध्याय के गुस्से का शिकार बने स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य एलआर पटेल मंगलवार को सस्पेंड होने से बच गए। अब उनके बारे में खेल मंत्री ने विधिक राय लेने को कहा है। 14 अप्रैल को वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज के निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर और तमाम खामियां मिलने पर खेल मंत्री ने प्रधानचार्य एलआर पटेल के तबादले का आदेश दिया था। अभी तक तबादला आदेश नहीं आया और श्री पटेल कार्य कर रहे हैं। मंगलवार को मीडिया ने मंत्री से इस बारे में पूछा तो उन्होंने प्रमुख सचिव और खेल निदेशालय के अफसरों से बातचीत की। आरएसओ व बाबू को सस्पेंड करने का आदेश दिया। साथ ही श्री पटेल के तबादला आदेश के बारे में पूछा, तो जवाब मिला कि उन्होंने एक बार अदालत से तबादला के खिलाफ स्टे लिया था, फाइल देखी जा रही है कि कोई विधिक अड़चन तो नहीं है। तब खफा मंत्री ने कहा कि सस्पेंड कर दो। कुछ देर बाद उन्होंने फिर फोन मिलाया और कहा कि पहले विधिक राय ले लो, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। इस तरह सस्पेंड होने से फिलहाल श्री पटेल बच गए।

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