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पश्चिमी यूपी की संस्कृति को जानेगा पूरा विश्व

पश्चिमी यूपी की लुप्तप्राय: संस्कृति की तरफ यूनेस्को का ध्यान जाने के बाद नेशनल म्यूजियम की टीम अब गांवों तक पहुंच रही है। पश्चिमी यूपी के गांवों में बची संस्कृति, लोगों के रहन-सहन, खान-पान और पहनावे को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही वेस्ट की संस्कृति देश के सामने विस्तृत रूप में आएगी।

  विश्व में विभिन्न क्षेत्रों की लुप्त होती जा रही संस्कृति को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासंघ और उसके तहत आने वाली यूनेस्को जैसी संस्थाएं देश के कई हिस्सों में बिखरी संस्कृति को सहेजने में जुटी हैं। पश्चिमी यूपी में परंपरागत सांस्कृतिक विरासत को कभी भी सहेजने, संरक्षित करने और उसे बचाए रखने के प्रयासों को लेकर सरकारी-गैरसरकारी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखी। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले अभियान से पश्चिमी यूपी की सभ्यता-संस्कृति के बचने और दुनिया के सामने आने की उम्मीद जगी है।
 
  वेस्ट यूपी की मान्यताओं, खानपान, पहवाने और रहन-सहन का अुनसंधान करने के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान नई दिल्ली को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पायलट प्रोजेक्ट के प्रथम चरण में पश्चिमी यूपी की संस्कृति का केंद्र मेरठ-बागपत क्षेत्र को मानते हुए नेशनल म्यूजियम का दल परिक्षेत्र में आया। टीम ने महिलाओं का पहनावा, प्राचीन आभूषण, पहनने के तौर-तरीकों की जानकारी ली। इसी के साथ मिट्टी के चूल्हे पर मिट्टी के ही बर्तनों में पश्चिमी यूपी में पंरपरागत भोजन बनाने की विधि आदि देखी। दल को मेरठ कैंटोनमेंट हैरिटेज कमेटी के सचिव डॉ. अमित पाठक, पक्षी विज्ञानी डॉ. रजत भार्गव, शहजाद राय शोध संस्थान बड़ौत के निदेशक अमित राय जैन ने सहयोग किया। इसमें मुस्लिम विवि अलीगढ़, चौधरी चरण सिंह विवि के शोधार्थी भी शामिल रहे।

अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में होगी वेस्ट की संस्कृति पर चर्चा
विश्व विरासत दिवस पर 18 अप्रैल को नेशनल म्यूजियम में होने वाले अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में पश्चिमी यूपी का चार सदस्यीय दल यहां की लुप्त होती संस्कृति, उसके संरक्षण के तौर-तरीकों को लेकर चर्चा करेगा। सेमिनार में डॉ. अमित पाठक और इतिहासार प्रो. केके शर्मा समेत चार लोग शिरकत करेंगे।

यह है अभियान
यूनेस्को ने 2003 में लुप्त प्राय: संस्कृतियों के संरक्षण का अभियान शुरू किया था। 2005 में भारत को भी इसमें शामिल कर लिया गया। टीम के सदस्यों का मानना है कि शहरों में तो खान-पान, रहन-सहन, बोलचाल, पहनावा आदि सब एक जैसा हो गया है लेकिन गांवों में अभी कुछ पुरानी मान्यताएं, रीतियां शेष हैं।

यह है योजना
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पश्चिमी यूपी में संस्कृति संरक्षण का कार्य होगा। संस्कृतियों के पीछे का आधार समझा जाएगा। फिर संस्कृित के आधार पर एक मॉडल तैयार किया जाएगा। जिसे पूरे देश में लागू किया जाएगा, फिर छोटी-छोटी संस्कृतियों का संग्रह कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा।

अभी तक यह कर चुके
टीम के साथ उस संस्कृति को सहेजने में जुटे हैं जो चंद लोगों तक ही सिमट कर रह गया है। अभी तक टीम रागनी, गीत, आल्हा आदि की रिकॉर्डिग कर चुके है।

नेशनल म्यूजियम में मिलेगी वेस्ट के संस्कृति की झलक
प्रथम चरण में वेस्ट के लोगों का रहन-सहन, पहनावा, खान-पान की झलक यहां मिलेगी। अभी तक एकत्रित की गई सामग्री नेशनल म्यूजियम को सौंप दी जाएगी। इनमें महिलाओं द्वारा पहने जाने वाला लहंगा, पगड़ी, धोती-कुर्ता, चमड़े की जूती, बेत शामिल है।

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  • Web Title:पश्चिमी यूपी की संस्कृति को जानेगा पूरा विश्व