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‘आलू’ के दाम देख किसानों के खिलाखिला रहे ‘चेहरे’

आलू उत्पादकों ने अपनी फसल की निरन्तर गिरी कीमतों के चलते बहुत मुफलिसी ङोली है। गर्दिश के ऐसे दिन देखे कि घर-परिवार की मामूली जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों का आसरा तलाशना पड़ गया। सीधे शब्दों में कहें तो जिन्दगी की ट्रेन पूरी तौर पर पटरी से उतर चुकी थी, लेकिन इस बार सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू के बाजार भाव ने फर्राटा भरा है। इसके चलते किसानों को अब अपनी आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीदें जगने लगी है। बीते दो वर्ष के आलू उत्पादन ने किसानों को खून के आंसू रुला दिया। कारण यह कि मंडियों की बिक्री से उत्पादन लागत तक निकलना दूभर हो गया। बीते साल के अंत में कोल्ड स्टोरेजों में रखा माल मात्र 135-140 रुपये प्रति बोरी तक बिका था। यह रुपये स्टोरेज का भाड़ा, वारदाना, ट्रान्सपोटेशन और खुदाई के मद को ही पूरा कर पाते थे। बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक दवाएं और अन्य कार्यों में किसानों को अपनी जेब से पैसा फूंक कर घाटा उठाना पड़ा। 
आलू उत्पादकों को लगातार दो फसलों में इसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इसके चलते वह घर की सारी जमा पूंजी खर्च करने के बाद बैंक और सूदखोरों के भारी कर्ज के बोझ तले दब कर रह गया। इस बार आलू उत्पादकों के दिन फिरते नजर आ रहे हैं। अगैती फसल जरूर 150 से 200 रुपये तक बिकी थी। मुख्य फसल की खुदाई के दौरान कीमतों ने 300 से 400 रुपये की ऊचॉई पकड़ ली है। इस सप्ताह अन्य प्रदेशों की मंडियों में आयी तेजी के कारण स्थानीय बाजार में भी उछाल आया है। 

500 रुपए प्रति बोरी तक पहुंची कीमत
शिकोहाबाद। बासी मुम्बई में आलू 1300 रुपये प्रति कुंतल बिक रहा है। यही कारण है कि स्थानीय बाजारों में 500 रुपये प्रति बोरी तक बिक रहा है। लेकिन इन कीमतों में बेचने को किसान तैयार नहीं दिख रहा।

अभी थोड़ा और इंतजार करेंगे किसान
शिकोहाबाद। अरांव निवासी आलू उत्पादक किसान रामेश्वर सिंह का कहना है कि अभी तो आलू का भाव 500 रुपए प्रति बोरी तक पहुंचा है लेकिन आगामी दिनों में यह भाव बढ़कर 700 से 800 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच जाएगा, तब ही आलू को निकाला जाएगा। सिरसागंज निवासी किसान अखिलेश शाक्य का कहना है कि आलू की कीमतें इस साल जरूर और बढ़ेंगीं। इससे किसानों को लाभ होगा और हमें अभी इंतजार करने की जरूरत है। हां, जिन किसानों को अभी रुपयों की जरूरत है, वे इसे बेच सकते हैं।

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