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पूर्वी दिल्ली ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरा

निगम चुनाव में पूर्वी दिल्ली ने कांग्रेस की उम्मीदों पर सबसे ज्यादा पानी फेरा है। कांग्रेस को कम से कम अपने गढ़ पूर्वी दिल्ली में निगम की सत्ता आने का भरोसा था लेकिन मतदाताओं की मर्जी के आगे उसकी  उम्मीदें परवान न चढ़ सकीं। पार्टी को इस निगम क्षेत्र में अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा से आधी सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। पूर्वी दिल्ली की 64 सीटों में से भाजपा को 35 और कांग्रेस को 18 सीटें मिली हैं। जबकि बसपा को 3 तथा 8 सीटें अन्य के खाते में गई हैं।

तीनों नगर निगमों में सबसे छोटे निगम की सत्ता में भाजपा को बहुमत मिल गया और कांग्रेस उम्मीद से विपरीत हाथ मलते रह गई। यहां भी कांग्रेस के लिए बहुत हद तक उसके अपने ही हार का सबब बने और रही सही कसर छोटे दलों ने पूरी कर दी। मसलन कल्याणपुरी वार्ड में कांग्रेस की जीत पर उसके अपने ही विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष अम्बरीश गौतम का भाई विक्रम सिंह गौतम ग्रहण बन कर उभरा। टिकट कटने से नाराज गौतम निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 4519 वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे जबकि कांग्रेस उम्मीदवार धर्मपाल मौर्य 5326 वोट के साथ दूसरे पर और इस स्थिति का फायदा उठाकर भाजपा उम्मीदवार राजकुमार ढिल्लो 7278 वोट पाकर जीत गए। इसी तरह पांडव नगर सीट पर मौजूदा पार्षद और कांग्रेस की उम्मीदवार रेणु शर्मा की जेठानी और निर्दलीय उम्मीदवार सरिता शर्मा पार्टी की हार का कारण बनीं। घर की कलह का फायदा उठाकर भाजपा उम्मीदवार लता गुप्ता बाजी मार ले गईं।
कोंडली में भाजपा और कांग्रेस दोनों में आपसी भितरघात का फायदा बसपा को मिल गया। बसपा की युवा उम्मीदवार प्रियंका गौतम ने कड़े त्रिकोंणीय संघर्ष में कांग्रेस की सविता वर्मा को महज 156 वोट से हरा दिया। इसी तरह त्रिलोकपुरी में कांग्रेस के बागी उम्मीदवार कमल बेनीवाल ने भाजपा के रामचरण गुजराती को 3110 वोट से हरा दिया। कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार डा. इअशोक चौहान तीसरे नंबर पर रहे।

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