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हांडी में चमचा बराबर चलाते रहिए

‘भाई मियां, कुछ लोगों में आदत होती है कि दूध में मलाई की तरह बहुत ऊपर-ऊपर तैरते रहते हैं। पर दो बूंद नींबू निचुड़ जाने के बाद फटे दूध जैसे नीचे चले जाते हैं। नई सरकार मुबारक, पर इसका यह मतलब नहीं कि कुछ लोग बेनकेल होकर मनमानी करें.. नियमों का उल्लंघन करें। सही संतुलन बनाए रखने के तईं इन पर लगाम कसना जरूरी है। तभी सरकार लोगों का विश्वास जीत सकेगी। जिन्हें कानून बनाने हैं, वे खुद कानून में रहें।’

एक पान मुंह में दबाकर मौलाना मुझे पेड़ की छांव में ले गए। बोले, ‘अमां एक दिन पेपर न आए, तो न्यूजों के तईं तबीयत हुड़क जाती है। आज के अखबार में एक जगह छपा है कि सौ और अफसरों के तबादले। सुभानल्लाह! दाल की हांडी में चमचा लगातार चलाकर दानों को तितर-बितर करते रहिए। निजाम ऐसे ही ठीक रहता है। जब-जब कहीं नई सरकार आई है, सबसे पहले अधिकारियों और पुलिस के बिल्लों की खैरियत पूछी गई है। इसको इधर फेंको, उसको उधर डालो, उसको वेटिंग में रखो। अपने आदमी को मलाई पर भेजो.. उसके आदमी को सूखे में डालो। जो जहां नया तैनात हुआ, उसने नारा फेंका कि हम यहां की व्यवस्था सुधार देंगे। व्यवस्था वहीं की वहीं रही.. सुधारने वाला खुद ही बिगड़ गया। आजादी के बाद से यही उठा-पटक देखता चला आ रहा हूं। महीनों मोहरे बिछाने में ही बीत जाते हैं। पब्लिक के ठेंगे पर। चाहे बजरंगी लाल को हटाओ, चाहे लियाकत अली को लाओ.. फर्क कुछ नहीं पड़ने वाला।’

पान दूसरे गाल तले ट्रांसफर करके मौलाना बोले, ‘अमां भाई मियां, हम भी 35 साल डाकखाने में रहे। जहां तैनात हुए, वहीं से रिटायर हुए। एक बार भी तबादले का बिस्तर गोल नहीं करना पड़ा। अब तो कइयों का यह हाल है कि नई जगह होल्डाल खोला भी नहीं और दूसरी जगह का ऑर्डर आ गया। खुदा जाने यों अगले को लुढ़काते रहने से व्यवस्था को कौन से चार चांद लग जाते हैं। फिर भी यह सरकारी तकनीक जारी है एक जगह किसी को जूते मत खोलने दो। चल यार, आज तो अपन भी ट्रांसफर कर लेते हैं। आज चाय करीम अली की बजाय राधे लाल के वहां पीते हैं। कम ऑन!’

 

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  • Web Title:हांडी में चमचा बराबर चलाते रहिए