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जरदारी का दौरा

कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत दौरे पर आए थे। यह उनकी निजी यात्रा थी। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि पाकिस्तान का कोई प्रतिनिधि भारत आए और आपसी विश्वास बहाली पर जोर न हो? हालांकि उनके दौरे से ऐन पहले करीब सौ पाकिस्तानी जवानों की मौत बर्फ में दबकर हो गई थी। अपने जवानों को खोने का दुख तो उन्हें होगा, फिर भी वह हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से काफी गर्मजोशी के साथ मिले। दोनों देशों के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है? हमारे प्रधानमंत्री काफी उदार दिल के हैं। ऐसे में, क्या यह मुमकिन नहीं कि दोनों देश अपने हितों की रक्षा करते हुए कोई ऐसा रास्ता निकालें, जिससे सीमा के दोनों पार की कड़वाहट कम हो और बेवजह जवानों की मौत भी न हो।
हिमांशु, ललिता पार्क, दिल्ली

भारतीयों का अपमान
आखिर कब तक भारत के सम्मानित लोग विदेशों में अपमानित होते रहेंगे? अकेले शाहरुख खान को ही दो बार अमेरिका के हवाई अड्डों पर जलील होना पड़ा है। इससे पहले भी कई और कलाकारों व राजनीतिक हस्तियों से अमेरिकी एयरपोर्ट पर घंटों पूछताछ की गई है। डॉ. कलाम जैसे बड़े कद के व्यक्ति भी इस अपमान से नहीं बच पाए। ऐसे में, यह जरूरी हो गया है कि विदेश मंत्रलय अमेरिका से अपनी सख्त नाराजगी जताए। भारत की गिनती दुनिया के बड़े देशों में होती है। ऐसे में, अगर हमारे नागरिकों की उपेक्षा हुई, तो इससे देश की बेइज्जती ही होगी और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के बीच गलत संदेश जाएगा। वैसे, विदेशी लोगों को भी यह समझना चाहिए कि हमारे यहां अतिथि देवो भव: की परंपरा है और हम दूसरों से भी यही उम्मीद रखते हैं।
दीपक बंसल, कौशांबी, गाजियाबाद

परवरिश का असर
दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा गरीब अभिभावकों के बच्चों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, जिनका इन दिनों गलत दुरुपयोग हो रहा है। मसलन, प्राइमरी स्कूल के बच्चों को पुस्तकें, कॉपियां बैग व स्कूल यूनिफॉर्म दिए जाते हैं। दोपहर का भोजन भी नि:शुल्क दिया जाता है और शिक्षा शुल्क न लेने का प्रावधान भी है। लेकिन ये बच्चे पढ़ाई नहीं करते, क्योंकि इनके घरों में पढ़ने-लिखने का माहौल ही नहीं होता है। ऐसे अधिकतर बच्चों के अभिभावक शाम होते ही शराब पीते हैं और सारे पैसे जुआ में खर्च कर देते हैं। घर के वयस्क लोग दिन भर आवारागर्दी करते हैं और लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही बंद करा दी जाती है। ऐसे में, हमारे नौनिहालों का भविष्य खराब होगा ही। इसे रोकने के लिए दिल्ली सरकार और समाज, दोनों को ही बेहतर परवरिश का ढांचा तैयार करना होगा, तभी शैक्षणिक सुविधाओं का सही फायदा होगा।
ब्रज मोहन, जी-2/94, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

क्या गंगा बचेगी
गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर लाखों-करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की बात तो अब आम हो चुकी है। वैसे भी इन परियोजनाओं को संबंधित अधिकारी अपनी जेब गरम करने का माध्यम मात्र समझते हैं। इन सबके बीच कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गंगा के अस्तित्व को बचाए रखने को लेकर एक योजना बनाने की बात कही थी। इससे हमारी उम्मीद जरूर जगती है। यह उम्मीद इसलिए नहीं जगी कि इसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री ने की है, बल्कि अब उन्हें भी अहसास हो चुका है कि बगैर उनके हस्तक्षेप के योजना कारगर और कामयाब नहीं हो पाएगी। खैर, हम तो यही चाहते हैं कि भारत की पहचान गंगा नदी को एक नया जीवन मिले।
नीलम कुमारी, साकेत, दिल्ली

 

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