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बिजनौर में तीन मिनट में लूटा बैंक

गांव पावटी निवासी रामनाथ, रमेश, महेश और पड़ोसी गांव पोटा के शौवीर निवासी के मुताबिक, घटना के दौरान बैंक में रुपये लेने के इंतजार में 13 ग्राहक लाइन में खड़े थे। अचानक मैनेजर के केबिन से मारपीट की आवाज आई।

उस वक्त दोपहर 1:05 मिनट का वक्त रहा होगा। ग्राहकों के मुताबिक, बदमाशों ने एक फायर झाेंकते हुए लोगों को अपने चेहरे नीचे करने को कहा। फिर बदमाश कैशियर के केबिन में घुसे और उसे गन प्वाइंट पर लेकर उससे नकदी लूट ली। एक बदमाश ने बैंक में मौजूद कर्मचारियों, ग्राहकों के मोबाइल फोन लिये और तोड़ डाले। दूसरे बदमाश ने कंप्यूटर तोड़ दिए। वारदात में बदमाशों को कुल तीन मिनट लगे और भाग गए।

लोगों के मुताबिक सभी बदमाश युवा थे, इनमें से एक ने नकाब लगाया था और बाकी के चेहरे खुले थे। सभी क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। बदमाशों ने जाते वक्त ग्राहकों को पुलिस में सूचना न देने की धमकी भी दी। वहीं पुलिस का मानना है कि घटना में प्रोफेशनल और इसी क्षेत्र के बदमाश शामिल रहे होंगे। 


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मिनट दर मिनट हुई घटना
..00 दोपहर एक बजे नौ बदमाश बैंक गेट पर पहुंचे
00 दोपहर 1:05 बजे बदमाश 4 बदमाश बैंक में घुसे
00 दोपहर 1:06 मिनट पर दो बदमाशों ने मैनेजर और एक ने भीड़ और एक ने कैशियर को काबू किया
00 दोपहर 1:07 मिनट पर मैनेजर से मारपीट और कैशियर से नगदी लूटी
00 दोपहर 1:08 मिनट पर बदमाश वारदात कर भाग गए
00 दोपहर 1:10 मिनट पर बैंक से पुलिस को फोन कर बुलाया गया
00 दोपहर 1:15 मिनट पर अम्हेड़ा पुलिस चौकी को स्टॉफ बैंक पहुंचा
00 दोपहर 1:20 मिनट पर एसओ हल्दौर मौके पर गए और अफसरों को फोन किया
00 दोपहर 1:40 मिनट पर एएसपी देहात मौके पर गए और एसपी ने जिले में चैकिंग कराई


सीसीटीवी कैमरें नहीं होने से पुलिस मायूसजिस बैंक में डकैती हुई, वहां पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इससे मौके पर गई पुलिस और एसओजी टीम मायूस हो गई। पु़लिस को उम्मीद थी कि, उन्हें सीसीटीवी कैमरों से बदमाशों की तस्वीर आसानी से मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों द्वारे बताए जा रहे बदमाशों के हुलिये के आधार पर ही लूटेरे तक पहुंचने की संभावना जता रही है।

कागजों में हो रही थी सुरक्षा
थाना हल्दौर की अम्हेड़ा पुलिस चौकी के रिकॉर्ड में कांस्टेविल श्यामवीर और एक होमगार्ड ड्यूटी पर था, लेकिन वारदात के दौरान कोई भी सुरक्षाकर्मी मौके पर नहीं होना सफल वारदात होने का कारण माना गया है। बताते है कि मौके बैंक चपरासी कृष्णा देवी ही थी, जिसके पास एक डंडा भी नहीं था। बैंक में घुसने के दौरान सबसे पहले बदमाशों का सामना कृष्णा से ही हुआ, जिसे धक्का देकर बदमाश मैनेजर के केबिन में घुसे।

204 में से एक पर रहता है गार्डजिले में सरकारी और गैरसरकारी 21 बैंक मौजूद हैं। सभी बैंको की जिले के नगरीय व ग्रामीण अंचलो में 204 बैंक शाखाएं खुली है। रोजाना इन शाखाओं से हजारों का नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ो का कारोबार होता है, लेकिन बैंकों के पास एक गार्ड रखने की हिम्मत नहीं होती। पुलिसकर्मियों की किल्लत के बावजूद बैंक पर गार्ड तैनात नहीं किया जाता, जबकि बैंक अफसरों के आगे-पीछे गार्डो को अक्सर देखा जाता है। बताया जाता है नजीबाबाद स्थित पीएनबी शाखा के पास ही एक सुरक्षा को गार्ड मुहैय्या। बाकी बैंकों की शाखा के लॉकरों में जमा करोड़ो की संपत्ति राम भरोसे हैं। बिना गार्ड के बदमाश ऐसे बैंको को निशाना न बनाए यह कहना उचित नहीं होगा।

छह साल पहले भी बैंक बना था टारगेट
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गांव पावटी स्थित सर्व ग्रामीण यूपी बैंक में नबंवर 06 की एक रात को बदमाशों ने टारगेट किया था। पुलिस पिकेट होने के बावजूद बदमाशों ने इसी बैंक की शाखा के ताले तोड़े थे। बदमाशों ने बैंक से नगदी चोरी करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन मजबूती के कारण स्टांग रूम नहीं टूट पाया था। चोरी बच गई थी, लेकिन पुलिस की फजीयत तब भी कम नहीं हुई।

बैंकों तक को खंगाल चुके हैं बदमाश..
00 12 जनवरी 09 की रात ग्राम मंडावली स्थित सर्व यूपी ग्रामीण बैंक खंगाला
00 वर्ष 03 में ग्राम मंडावली स्थित सर्व विदुर ग्रामीण बैंक शाखा से तीन बदमाशों ने 90 हजार रुपये की लूट
00 दस फरवरी 05 को थाना मंडावर के ग्राम इनामपुरा स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा मोहम्मदपुर देवमल से दिन दहाड़े दो लाख 65 हजार 461 रुपये की लूट
00 वर्ष 06 में भी ग्राम मंडावली स्थित सर्व ग्रामीण बैंक का शटर तोड़ा
00 वर्ष 01 में हल्दौर स्थित एक बैंक में नकब लगाने को दुस्साहस
00 नबंवर 06 में हल्दौर के ग्राम पावटी स्थित विदुर ग्रामीण बैंक के ताले टूटे।


इंश्योरेड हैं जिलें की बैंक शाखाएं
बदमाश बैंक को कितनी मर्तबा क्यूं न लूटे। इससे नुकसान बैंक का नहीं होने वाला। बात अटपटी जरूर लग रही हो, मगर सौ फीसदी सच है। जिले के ज्यादातर बैंक इंश्योरेड होने के चलते शायद यहां चौकीदार नहीं रखे जाते। नतीजन बैंको को बदमाश निशाना बना भी लें, तब भी नुकसान बैंक को नहीं, इंश्योरेंस कंपनी का होगा। बैंक शाखाओं पर चौकीदार न रखने को बैंक अधिकारी सरकार की लापरवाही बताने से नहीं हिचक रहे कि सरकार चौकीदार रखने का खर्च नहीं देती।

दस हजार पर है एक सिपाही
बैंक की रखवाली का पूरा जिम्मा पुलिस के जिम्मे बताया जा रहा है, जबकि दस हजार लोगों की सुरक्षा का जिम्मा पहले से ही एक सिपाही के जिम्मे हैं। दिन के समय एक दरोगा और दो सिपाहियों को अपने थाना क्षेत्र में सभी बैंको की सुरक्षा भी करनी होती है। यह हालात पूरे जिले के होते हैं। इस बीच में वीआईपी और शांति व्यवस्था भी संभालना इन्हीं के भरोसे हैं। ऐसे में बैंको की सुरक्षा किस तरह हो रही है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।


गार्ड रखने को नहीं मिलता मद

जिले में सरकारी और गैर सरकारी दो दजर्न बैंक मौजूद हैं। सभी बैंको की जिले के नगरीय व ग्रामीण अंचलो में 204 बैंक शाखाएं खुली हैं। रोजाना लाखों करोड़ो का कारोबार करने वाले इन बैंको के पास अपनी सुरक्षा को कोई इंतजाम नहीं हैं। हालांकि नजीबाबाद स्थित पीएनबी शाखा पर ही गार्ड तैनात है। इसके अलावा बैंक के लॉकरो में जमा करोड़ो की संपत्ति राम भरोसे हैं। बिना गार्ड के बदमाश ऐसे बैंको को निशाना न बनाए यह कहना उचित नहीं होगा।

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