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बंधक संकट पर ओडिशा सरकार को करना है फैसला: चिदंबरम

ओडिशा में माओवादियों द्वारा अपहृत बीजद विधायक की रिहाई के बदले भाकपा-माओवादी के कई नेताओं को छोडे़ जाने से सुरक्षाबलों का मनोबल गिरने की आशंका पर केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिंदबरम ने कहा कि इस बारे में जो भी फैसला करना है, ओडिशा सरकार करेगी।

यह पूछने पर कि कल आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक में क्या ओडिशा के मुख्यमंत्री ने यह मुद्दा उठाया तो चिदंबरम ने कहा कि मुख्यमंत्रियों की बैठक का बंधक संकट से कोई लेना देना नहीं है। इस बारे में बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने न तो अपहरण के बारे में चर्चा की और न ही अपहृर्ताओं से चल रही वार्ता के बारे में। मैंने भी यह मुद्दा नहीं उठाया।
 
उन्होंने कहा कि इस बारे में जो भी करना है, ओडिशा सरकार को करना है। मैं इस बारे में फैसला देने के लिए यहां नहीं बैठा हूं। गृह मंत्री से सवाल किया गया कि ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियान में भारी संख्या में केन्द्रीय अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं। विधायक की रिहाई के बदले कई उन नक्सली नेताओं को छोड़ने से सुरक्षाबलों का मनोबल गिरेगा, जिन्हें उन्होंने काफी मशक्कत के बाद पकड़ा था।

इस पर गृह मंत्री ने जवाब दिया कि जो भी केन्द्रीय बल तैनात किए गए, राज्य सरकार के आग्रह पर किए गए। पिछले दो सप्ताह से (ओडिशा में) कार्रवाई रुकी हुई है। फिर से कार्रवाई कब शुरू होगी, ये तो राज्य ही तय करेगा। चिदंबरम ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला राज्य सरकार को करना है।
 
यह पूछने पर कि बंधक संकट से निपटने के लिए क्या केन्द्र और राज्य के बीच मिलजुलकर एकीकृत योजना तैयार करने के बारे में कोई चर्चा हुई तो चिदंबरम ने कहा कि इस समय कोई ऐसी एकीकृत स्थिति नहीं बनी है, जिसके तहत तय हो कि बंधक संकट से कैसे निपटना है। फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

 

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  • Web Title:बंधक संकट पर ओडिशा सरकार को करना है फैसला: चिदंबरम