DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फिर दैवीय आपदा का शिकार हुआ बुंदेलखण्ड

'दिल के अरमां आंसुओं में बह गए'। कुछ ऐसे ही हालात कई साल से दैवीय आपदाओं के कारण बदहाली झेल रहे बुंदेलखण्ड के किसानों के हो गए हैं। इस साल भी ओला और चक्रवाती हवाओं से खेत में खड़ी गेहूं की फसल चौपट हो गई। अब किसान खेत में बिखरे अनाज के दाने समेटने में लगा है। पांच अरब रुपये से ज्यादा का सरकारी कर्ज लिए क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं। इन किसानों को सरकारी मदद की भी ज्यादा उम्मीद नहीं है।

पिछले कई सालों से बुंदेलखण्ड का किसान सूखे की मार झेल रहा है। तमाम संसाधनों की कमी के बावजूद इस बार गेहूं की अच्छी फसल खेतों में लहलहा रही थी। किसानों को उम्मीद थी कि इस फसल से उनके ऊपर लदा सरकारी कर्ज तो उतर ही जाएगा साथ ही घरेलू जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी। पर उनके अरमां हमेशा की तरह इस बार भी आंसुओं में बह गए लगते हैं।

किसानों की किस्मत ने फिर दगा दे दिया है और कई दिनों से चल रही तेज आंधी और ओलों ने हजारों एकड़ में खड़ी गेहूं की पकी फसल को चौपट कर दिया। आंधी का आलम तो यह था कि खलिहानों में रखे गेहूं के गट्ठरों का पता ही नहीं चला।

दैवीय कहर के शिकार बुंदेलखण्ड के सभी सात जनपद बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, झांसी व ललितपुर के किसान हुए हैं। बांदा जनपद के तेंदुरा, चौसड़, बल्लान, बाघा, नादनमऊ, लमेहटा, शाहपुरसानी, सिंहपुरमाफी, पारा और डभनी गांव का किसान एक भी अनाज का दाना घर नहीं ले जा पाया है।

तेंदुरा गांव के किसान रामलगन सिंह ने बताया,''उनकी 5० बीघे की फसल नष्ट हो गई है।'' इसी गांव के किसान शेषकुमार सिंह का कहना है, ''पूरी फसल खेतों एवं खलिहानों में रखी थी। इसके नष्ट हो जाने के बाद सरकारी कर्ज की अदायगी और बेटी के विवाह की समस्या उत्पन्न हो गई है।''

बारिश रोकने के लिए किसान शाम ढलते ही मंदिरों की ड्योढ़ी पर भगवान की पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं, ताकि देवराज इंद्र को खुश किया जा सके। बांदा की जिलाधिकारी शीतल वर्मा का कहना है कि समस्त उप जिलाधिकारियों से उनके इलाके में हुए नुकसान का ब्योरा मांगा गया है।

ललितपुर जनपद के किसान राजेश सहरिया ने बताया, ''जखौरा ब्लॉक के भरतपुरा, देवगढ़, मंड़वारी और राजगढ़ इलाके के किसान पूरी तौर पर बर्बाद हो चुके हैं, पूरी फसल खेतों में बिखर गई है।'' भरतपुरा के ग्राम प्रधान सोबरन सिंह यादव का कहना है कि मजदूरों की कमी के चलते बड़े काश्तकारों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

ललितपुर की जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने बताया, ''नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व अधिकारियों की टीमें लगाई गई हैं, रिपोर्ट मिलते ही शासन को मदद के लिए लिखा जाएगा।'

गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) 'प्रवास सोसायटी' के सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर ने बताया, ''बुंदेलखण्ड के किसानों पर पांच अरब रुपये से ज्यादा का सरकारी कर्ज है, ज्यादातर किसानों ने खाद-बीज और पानी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से यह कर्ज लिया था।''

दैवीय आपदा से प्रभावित किसानों के लिए सहायता की मांग करते हुए भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) चित्रकूटधाम-बांदा परिक्षेत्र के महासचिव ध्रुव सिंह तोमर ने कहा, ''पिछले साल भी ओला और बेमौसम बारिश से फसल नष्ट हो गई थी। लेकिन एक धेला भी सरकारी मदद नहीं मिली, इस साल भी सरकारी मदद की ज्यादा उम्मीद नहीं है।' उन्होंने कहा कि सरकार कर्ज वसूली को रोककर न्यूनतम उत्पादन के आधार पर किसानों को मुआवजा दे।

कुछ ऐसी ही राय एक अन्य गैर सरकारी संगठन कृषि एवं पर्यावरण विकास संस्थान के निदेशक सुरेश रैकवार की भी है। उन्होंने कहा, ''दैवीय आपदा में 70 से 90 फीसदी तक फसल का नुकसान हुआ है। सरकार को चाहिए कि किसानों का कर्ज माफ कर वाजिब मुआवजा दे।''

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फिर दैवीय आपदा का शिकार हुआ बुंदेलखण्ड