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अगवा विधायक की रिहाई पर कोई प्रगति नहीं

नक्सलियों द्वारा सरकार को दी गई समय सीमा समाप्त होने में मात्र एक दिन शेष रह गया है, लेकिन ओडिशा के विधायक झीना हिकाका की रिहाई को लेकर मंगलवार को भी अनिश्चितता बरकरार है। सरकार और नक्सलियों, दोनों ने अपने-अपने रुख से पीछे हटने से इंकार कर दिया है।

जहां एक ओर नक्सली चाहते हैं कि सरकार, बीजू जनता दल (बीजद) के विधायक की रिहाई के एवज में 29 नक्सलियों को रिहा करे, वहीं सरकार का कहना है कि वह मात्र 25 नक्सलियों को ही रिहा करेगी।

इस बात को लेकर भी भ्रम की स्थिति है कि आखिर कैदियों की रिहाई के लिए जमानत की अर्जी कौन दायर करेगा। इधर, नक्सलियों द्वारा सरकार को दी गई समय सीमा बुधवार शाम समाप्त हो जाएगी।

सरकार का कहना है कि कैदी आसपास की अदालतों में अपने वकीलों के माध्यम से जमानत की अर्जी दाखिल करेंगे, जिससे नक्सलियों ने इंकार कर दिया है।

हिकाका को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष क्षेत्रीय समिति ने 24 मार्च को उनके गृह जनपद कोरापुट से अगवा कर लिया था।

नक्सलियों ने जिन 29 कैदियों की रिहाई की मांग की है, उनमें से अधिकांश चासी मुलिया आदिवासी संघ के सदस्य हैं। यह संघ, मलकानगिरि और कोरापुट जिलों सहित मुख्यरूप से राज्य के दक्षिणी हिस्सों में जनजातीय समुदाय से सम्बंधित मुद्दों पर काम करता है।

संघ के नेता मचिका लिंगा के अनुसार, सरकार को कैदियों के खिलाफ लगाए गए मामले खुद से वापस लेने होंगे, क्योंकि वे बेगुनाह हैं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है।

संघ के वकील निहार पटनायक ने कहा कि नक्सलियों ने जमानत याचिका दायर करने से उन्हें मना किया है। उन्होंने कहा, ''वे चाहते हैं कि सरकार अपराध दंड संहिता की धारा 321 के तहत स्वयं अदालतों में जाए।''

पटनायक ने कहा कि धारा 321 किसी भी सरकारी अभियोजक को यह अधिकार देती है कि वह फैसला होने से पहले किसी मामले को कभी भी वापस ले सकता है।

 

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  • Web Title:उड़ीसा में अगवा विधायक की रिहाई पर कोई प्रगति नहीं