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बथानी टोला नरसंहार मामले में दिए गए

पटना हाईकोर्ट ने आरा के बथानी टोला नरसंहार काण्ड के सभी दोषियों की सजा रद्द करते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह तथा न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार सिंह की खण्डपीठ ने निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध दायर अपीलों को मंजूर करते हुए सबको रिहा करने का फैसला सोमवार को सुनाया। साथ ही निचली अदालत के फैसले को भी रद्द कर दिया।

उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई 1996 को रात के दो बजे बथानी टोला पर हमला कर अपराधियों ने नरसंहार को अंजाम दिया था। जिसमें 20 लोगों की हत्या हुई थी। मरने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। 18 लोगों की मौत मौकाए वारदात पर ही हो गई थी जबकि 2 ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

आरा के अपर सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने ट्रायल के बाद तीन को फांसी जबकि 20 को उम्रकैद की सजा 5 मई 2010 को सुनाई थी। इसी के खिलाफ अपील दायर की गई थी। जिसपर सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस कांड में कुल 53 अभियुक्त बनाए गए थे। ट्रायल के बाद निचली अदालत ने 30 को बरी कर दिया था। सोमवार को हाईकोर्ट ने सभी दोषियों की सजा रद्द करते हुए दोष मुक्त कर दिया। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में पुलिस असली अपराधियों को पकड़ नहीं पाई और वे बच कर निकल भागे।

लेकिन जिनकों पकड़ कर मुकदमा चलाया गया उनके खिलाफ कोई साक्ष्य ही नहीं पाया गया। अभियोजन पक्ष इस मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रही। अदालत ने अभियोजन के तौर तरीके पर भी तीखी टिप्पणी की है। अपीलकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्तता कृष्ण प्रसाद सिंह समेत अन्य वकीलों ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा था।

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