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परियोजना से स्थानीय लोगों को जोड़ने पर हो रहा विचार

वाल्मीकिनगर व्याघ्र परियोजना को विकसित करने के लिए जाने-माने वन संरक्षक पीके सेन की अध्यक्षता में राज्य वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया। सूबे में इस स्थान को इको टूरिज्म के बतौर विकसित करने के प्रयास चल रहे हैं।

प्रधान वन संरक्षक बीए खान का कहना है कि पीके सेन को पूरे इलाके को विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेवारी सौंपी गई है। वह अपनी रिपोर्ट दो महीने के अंदर सौंप देंगे। वाल्मीकि नगर क्षेत्र में विशेषज्ञों ने उन सभी संभावित स्पॉट का निरीक्षण किया, जिन्हें विकसित करने की काफी संभावना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को विकसित करने के बाद इसे संचालित करने के लिए पर्यटन विभाग को सौंप दिया जाएगा।

450 वर्ग किमी क्षेत्र होगा विकसित
वल्मीकि नगर व्याघ्र परियोजना का पूरा क्षेत्र करीब 900 वर्ग किमी में फैला है। इसमें करीब 450 वर्ग किमी क्षेत्र ही सुविधापूर्वक घूमा जा सकता है। शेष क्षेत्र में अत्यधिक घना जंगल होने से इसके अंदर घूमने के लिए ट्रैक नहीं बनाए जाएंगे। इस क्षेत्र में पर्यटकों को ठहरने के लिए होटल के स्थान पर कॉटेज बनाए जाएंगे। ये कॉटेज पूरे क्षेत्र में चार-पांच स्थानों पर पांच-छह के समूह में बनाए जाएंगे। इन स्थानों को हब के रूप में विकसित किया जाएगा। एक हब में रहने और खाने की सभी सुविधाएं होंगी।

इस परियोजना के आसपास मौजूद गांव वालों को इससे जोड़ने के लिए विशेष कार्ययोजना विभाग बना रहा है। ताकि इस स्थान का संरक्षण भी हो सके और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सके। यहां विकसित होने वाले कॉटेज, होटल समेत अन्य सुविधाओं की देखभाल करने की जिम्मेवारी इन्हीं लोगों को देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय लोगों को सरकारी स्तर से समुचित ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि पीके सेन की रिपोर्ट आने के बाद ही विभाग इस मामले में कोई स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करेगा।

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