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वृद्धों के लिए बनेंगे अलग वार्ड और क्लिनिक

अस्पतालों में वृद्धों की विशेष सेवा होगी। पहली बार सरकारी अस्पतालों में उनके लिए जिरेट्रिक क्लिनिक खोले जा रहे हैं। उनकी सेवा में चूक न हो इसके लिए अलग वार्ड बनाए जा रहे हैं। शुरुआत 10 बेड के वार्ड से की जा रही है। पहले चरण में छह जिलों का चयन किया गया है। इन छह जिला अस्पतालों में जून तक बूढ़ों के इलाज की पूरी व्यवस्था कर ली जाएगी।

क्लिनिक के सुचारू संचालन के लिए कांट्रेक्ट पर कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। जिरेट्रिक क्लिनिक खोलने के लिए पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, रोहतास और कैमूर जिले का चयन किया गया है। अभी देश में 8 फीसदी आबादी  60 वर्ष से ऊपर की है। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ने के कारण औसत जीवन काल बढ़ने से इनकी संख्या बढ़ रही है। आजादी के समय औसत जीवन काल 32 वर्ष का था जो छह दशक में 64 वर्ष पर पहुंच गया है। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में इनके इलाज की अलग व्यवस्था महसूस की जाने लगी है।

नेशनल प्रोग्राम फॉर द हेल्थ केयर ऑफ द एलडरली (एनपीएचसीई) के तहत पहली बार सरकारी अस्पतालों में बूढ़ों के लिए जिरेट्रिक क्लिनिक खोलने का कार्यक्रम बनाया गया है। इस अवस्था की आम बीमारी यथा घुटनों में दर्द, दमा, हृदय रोग, मधुमेह, सांस की अन्य बीमारी, हाई और लो ब्लड प्रेसर समेत आम बीमारियों के इलाज की अलग व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में की जाएगी। उन्हें अलग वाडरे में भर्ती कर विशेष सेवा होगी।

‘केन्द्र प्रायोजित एनपीएचसीई कार्यक्रम के तहत चयनित छह जिला अस्पतालों में जून के अन्त तक सारी व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी।’
स्वास्थ्य सचिव: संजय कुमार

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