DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब मजदूर भी होंगे श्री तकनीक के विशेषज्ञ

खेती की नई तकनीक में रोपनी की पुरानी पद्धति नहीं चलेगी। श्री विधि के विस्तार के साथ ही रोपनी करने वाले मजदूरों को भी इस नई तकनीक से लैस होना होगा। लेकिन इसके लिए उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं, सरकार खुद इसकी व्यवस्था कर रही है।

सरकार उन्हें श्री तकनीक से रोपनी की ट्रेनिंग देगी। लेकिन फिलहाल यह कार्यक्रम सिर्फ महिला मजदूरों के लिए है। इसी के साथ श्री तकनीक का गुर सिखाने के लिए बिहारी किसानों को उधार मांगने वाले राज्यों को अब बिहार में इसके विशेषज्ञ मजदूर भी मिल जाएंगे।

श्री तकनीक के विस्तार के साथ ही इस वर्ष हर प्रखंड में रोपनी करने वाली पांच सौ महिला श्रमिकों को प्रशिक्षित करने की योजना सरकार ने बनाई है। तकनीक का प्रसार होते ही रोपनी करने वाले प्रशिक्षित श्रमिकों की संख्या भी बढ़ेगी।

मजदूरों को नर्सरी लगाने से लेकर रोपनी तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीजोपचार की तकनीक भी उन्हें बताई जाएगी। नर्सरी लगाने की ट्रेंनिंग के बाद दस दिन का गैप देकर रोपनी की ट्रेनिंग होगी।

इसके लिए विभाग ने सभी जिलों में पत्र भेजकर प्रशिक्षकों का नाम मांगा है। मजदूरों के चयन की जिम्मेदारी प्रखंड के कृषि अधिकारियों की होगी। प्रशिक्षण सरकारी फार्मो में चलाया जाएगा। जिन प्रखंडों में फार्म नहीं हैं वहां यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केन्द्र या प्रगतिशील किसानों के खेत में चलेगा। प्रखंड में रोपनी के समय के अनुसार वहां के प्रशिक्षण की तारीख तय होगी। अभियान 28 मई से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक चलेगा।

कृषि उत्पादन आयुक्त सह विकास आयुक्त एके सिन्हा ने इससे संबंधित आदेश सभी जिलों को भेज दिया है। निर्देश में साफ कहा गया है कि ‘प्रशिक्षण टाकिंग टाइप नहीं डुइंग टाइप होगा’। यानी मजदूरों को प्रैक्टिकल कराते हुए जानकारी देनी है। साथ ही विषय वस्तु विशेषज्ञों (एसएमएस), किसान सलाहकारों और प्रखंड के सभी अधिकारियों और वैज्ञानिकों को इस काम में लगने का निर्देश दिया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अब मजदूर भी होंगे श्री तकनीक के विशेषज्ञ