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पांच साल में 37 बार चीन ने की घुसपैठ

अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद चीनी सेना की घुसपैठ अब उत्तराखंड में बढ़ने लगी है। उत्तराखंड के चमोली जिले के बाराहोती क्षेत्र में बीते पांच वर्षो में चीनी सैनिकों ने 37 बार घुसपैठ की। बाराहोती पर चीन अरसे से दावा जताता है, जिसे भारत ने खारिज किया है। लेकिन ड्रैगन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इसलिए देश की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड के रास्ते नई समस्या खड़ी हो सकती है।

अरुणाचल और सिक्किम में चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) कई बार भारतीय सीमा में घुसपैठ कर चुकी है। भारत के विरोध के बाद इन क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं कम हुईं, लेकिन हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बढ़ गई हैं। जम्मू-कश्मीर के सियाचिन से लगे पश्चिमी सेक्टर और लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना की घुसपैठ की घटनाओं पर इस साल मार्च में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। अब आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बाराहोती में चीनी घुसपैठ का खुलासा करते हुए कहा कि राज्य के लिए यह बेहद संवेदनशील मामला है। कहा जा रहा है कि बाराहोती क्षेत्र में चीनी सैनिक न सिर्फ हथियारों समेत घुसे, बल्कि बीते साल इसके मैदानी इलाके में एक हेलीकॉप्टर भी उतारा था। उत्तराखंड का 350 किलोमीटर क्षेत्र चीन से लगा है जहां आईटीबीपी के जवान तैनात हैं।

अक्साई चिन में चीनी वेधशाला से कोई खतरा नहीं : जम्मू-कश्मीर से लगते अक्साई चिन क्षेत्र में चीन की प्रस्तावित वेधशाला के निर्माण से भारत की सुरक्षा के लिए खतरे की आशंका को सरकार और सेना ने तवज्जो नहीं दी है। अक्साई चिन वह इलाका है, जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध के बाद कब्जा कर लिया था। सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने सोमवार को कहा कि अक्साई चिन सियाचिन ग्लेशियर से काफी दूर है। मीडिया रिपोर्टो में यह बात सामने आई है कि चीन इस क्षेत्र में वेधशाला का निर्माण करना चाहता है। मगर, आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

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