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पहले से ज्यादा घातक हुए आतंकी

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश के हालात फिलहाल संतोषजनक हैं लेकिन अभी भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए और अधिक कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

एक तरफ जहां सरकार सुरक्षा को लेकर नए-नए कदम उठा रही है, वहीं आतंकवादी संगठन पहले से ज्यादा चालाक और ज्यादा घातक हो गए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने सीमाओं से बाहर अपने नेटवर्क का विस्तार कर लिया है। आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सोमवार को प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2010 की तुलना में 2011 में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति सुधरी है। जम्मू-कश्मीर में हिंसा कम हुई और वहां सैलानियों की संख्या बढ़ रही है। वामपंथी उग्रवाद से मारे जाने वालों की संख्या भी कमी आई है। पूवरेत्तर राज्यों में भी हिंसा घटी है। लेकिन इसके बावजूद आतंकवाद, वापमंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरता और जातीय हिंसा देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। इन चुनौतियों से कड़ाई से निपटना होगा। आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र राज्यों के समन्वित प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एनसीटीसी पर पांच मई को बैठक होगी। उन्होंने साफ किया कि आतंरिक सुरक्षा से निपटने के उपायों का बोझ सिर्फ राज्यों पर नहीं डाला जाएगा। इससे निपटने को केंद्र राज्य मिलकर मजबूत एवं प्रभावी संस्थागत तंत्र स्थापित करेंगे।

 

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