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शेरों को लेकर गुजरात और मध्य प्रदेश में तकरार

सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश ने गुजरात के एशियाई शेरों को उसके कुनो पालपुर अभयारण्य में भेजे जाने की वकालत करते हुए कहा कि संकट में आई प्रजाति के लिए वहां उपयुक्त माहौल है।

राज्य की वकील विभा दत्त मखीजा ने केएस राधाकृष्णन और सीके प्रसाद की विशेष वन पीठ से कहा कि उसके अभयारण्य में शेरों को लाने के लिए सभी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं, विशेषज्ञता और पर्यावरण है। उन्होंने गुजरात सरकार के इस तर्क का विरोध किया कि मध्य प्रदेश शेरों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं होगा क्योकि राज्य पन्ना में अपनी बाघों की आबादी को संरक्षित करने में विफल रहा है।

विभा ने पीठ से कहा कि पन्ना अभयारण्य में बाघों की कोई आबादी नहीं होने के गुजरात के दावों के विपरीत क्षेत्र में राज्य सरकार के संरक्षण के सतत प्रयासों के कारण 16 बाघ हैं। उन्होंने गुजरात के इन तर्कों को भी गलत बताया कि बाघों को मध्य प्रदेश भेजना आदर्श स्थिति नहीं होगा क्योंकि वे चीतों और बाघों के साथ जीवन नहीं जी पाएंगे। विभा ने कहा कि विशेषज्ञों के अध्ययनों में यह तथ्य स्थापित हो गया है कि ये वन्य जीव एकसाथ रह सकते हैं।

पिछली सुनवाई में गुजरात ने गिर अभयारण्य से सिंहों को मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य में भेजे जाने के केन्द्र के किसी भी प्रयास का विरोध किया था।

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