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पाकिस्तान में क्रिकेट खेला जाना क्यों जरूरी

बांग्लादेश ही सही, किसी विदेशी टीम ने पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने को लेकर हामी तो भरी। वरना पाकिस्तान में क्रिकेट की असमय मौत हो रही थी। पाकिस्तान के खिलाफ एक वनडे और एक टी-20 मैच खेलने के लिए इसी महीने के अंत में बांग्लादेश की टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी। मार्च 2009 में लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के पास श्रीलंका की टीम पर हुए आतंकी हमले के बाद किसी भी विदेशी टीम ने पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था। तीन साल से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है, पाकिस्तान के मैदानों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट देखने को लोग तरस गए। ऐसे में, बांग्लादेश का यह दौरा पाकिस्तान, वहां के क्रिकेट बोर्ड व खेल प्रेमियों, तीनों के लिए अच्छी खबर है।

इस दौरे का मतलब है, पाकिस्तान में क्रिकेट को एक सहारा मिलना। पाकिस्तान की जमीन पर होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को अगर अलग रखकर देखा जाए, तो वहां मैच खेला जाना खुद क्रिकेट के लिए बहुत जरूरी है। पूरी दुनिया में क्रिकेट की लोकप्रियता में कमी का खतरा गहराता जा रहा है। याद करें कि आखिरी बार आपने वेस्ट इंडीज या न्यूजीलैंड जैसी टीमों के मैच को कब ‘फॉलो’ किया था? क्रिकेट की ‘ओवरडोज’ और बोर्ड के साथ विवादों की वजह से कुछ देशों की टीमों के खेल पर तो किसी की नजर ही नहीं है। वेस्ट इंडीज और श्रीलंका की टीमों का रह-रहकर अपने बोर्ड के साथ विवाद चलता रहता है। इन परिस्थितियों में भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और कुछ हद तक दक्षिण अफ्रीका की टीमों के प्रदर्शन पर ही क्रिकेट प्रेमियों की नजर रहती है।

पाकिस्तान की टीम में लोगों की दिलचस्पी मुल्क से बाहर भी थी, लेकिन अपने ही मुल्क में क्रिकेट के न होने की वजह से टीम हाशिये पर जा रही थी। क्रिकेट के लिए यह कतई सुखद स्थिति नहीं कही जा सकती कि शाहिद आफरीदी, मिस्बाह उल हक, उमर गुल या सईद अजमल जैसे खिलाड़ियों को देखने के लिए प्रशंसकों को लंबा इंतजार करना पड़े। इसलिए बांग्लादेश के दौरे की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि अगर पाकिस्तान इस दौरे का सफल आयोजन कराता है, तो इससे दूसरे देशों के भी वहां जाने के रास्ते खुलेंगे। बांग्लादेश के अलावा एशियाई टीमों में भारत और श्रीलंका ही हैं। पिछले दिनों जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत आए थे, तो उन्होंने ‘क्रिकेट रिश्तों’ को बहाल करने की अपील की थी। फिलहाल भारतीय क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा किसी सूरत में मुमकिन नहीं है, पर अगर पाकिस्तान की सरकार और क्रिकेट बोर्ड अच्छे माहौल में अगले कुछ दिनों तक मैच आयोजित कराते हैं, तो भारतीय टीम पाकिस्तान जा भी सकती है। फिर शायद श्रीलंका की टीम भी बुरी यादों को भुलाकर पाकिस्तान जाने के लिए हामी भर दे। फिलहाल तो पाकिस्तान बुरी खबरों का देश है, अच्छी खबरें वहां क्रिकेट से ही आ सकती हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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