DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सड़कों पर स्कूल

भारत में हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, लेकिन हकीकत में यह अधिकार सभी को मिलता नहीं। पश्चिम के विकसित देशों में हालात बेहतर हैं, लेकिन शिक्षा से महरूम रहने वाले बच्चों की संख्या चौंका देने वाली है। जर्मनी के मानहाइम शहर में गरीब बच्चों के लिए सड़कों पर स्कूल चल रहे हैं। यहां न तो क्लासरूम हैं और न ही स्कूलों में मिलने वाली अन्य सुविधाएं। दरअसल, यह मानहाइम यूनिवर्सिटी की पहल है। बेघर लोगों के लिए बनाए गए शिविर में यह स्कूल चल रहा है। इस जगह को फ्रीजोन कहा जाता है। यहां बेघर लोग खाना खाने और रात बिताने आते हैं। इसी के बेसमेंट में यह स्कूल चल रहा है। फ्रीजोन चलाने वाली समाज सेविका आंद्रेया शुल्त्ज का कहना है, ‘हमने सोचा कि कुछ भी हो, हमें कोई तरीका ढूंढ़ना है कि स्कूल हम तक पहुंच जाए।’ इस स्कूल में बच्चे किसी भी वक्त दाखिला ले सकते हैं। उन्हें इस बात की चिंता भी नहीं करनी पड़ती कि उनकी क्लास में कुल कितने बच्चे होंगे, क्योंकि यहां हर बच्चे को अलग से पढ़ाया जाता है- टय़ूशन क्लास की तरह। यहां टीचर के रूप में अधिकतर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स काम करते हैं, जो बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं। यहां पढ़ने वाली 15 साल की डियाने कहती है, ‘मेरा परिवार गरीब है, पर मैं एक अच्छी जिंदगी बिताना चाहती हूं। मैं किसी पर निर्भर नहीं होना चाहती और इसके लिए मुझे जो भी करना पड़ेगा, मैं करूंगी।’ डियाने की अपने जैसे बच्चों को सलाह है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं, आप जब चाहें स्कूल पूरा कर सकते हैं।
डायचे वेले बेव पोर्टल से

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सड़कों पर स्कूल