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प्रमोशन में रिजर्वेशन खत्म, मातहत बनेंगे बॉस

दोहरे आरक्षण का लाभ लेकर अधिकारी बने दलित अफसरों के दिन लद गए हैं। शासन ने केवल प्रमोशन में पुरानी पद्धति को बरकरार रखा है, बल्कि ऐसे अफसरों को मूल पदों पर लाने की कवायद भी तेज कर दी  है। शासन ने पावर कॉरपोरेशन के सीएमडी से सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की डिटेल मांगी है। अगर सरकार की इच्छा परवान चढ़ा तो पीवीवीएनएल के कई मुख्य अभियंता और दूसरे पदों पर बैठे अफसरों को अपने मूल पदों पर जाना पड़ सकता है।
 
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने शासन को सौंपे ब्योरे में उल्टे-सीधे हुए प्रमोशन का जिक्र किया था। मेरठ डिस्कॉम पर गौर करें तो यहां दलित कोटे से तीन मुख्य अभियंता हैं। योगेश कुमार (मुख्य अभियंता गाजियाबाद), हरिमोहन (मुख्य अभियंता सहारनपुर) और किशन सिंह (मुख्य अभियंता मेरठ) हैं। इनमें किशन सिंह सबसे वरिष्ठ हैं। जबकि इन्हें सबसे कनिष्ठ योगेश कुमार के बाद मुख्य अभियंता का चार्ज मिला। किशन सिंह मेरठ में योगेश कुमार के अंडर में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (शहर) रह चुके हैं। इसी तरह सामान्य वर्ग में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर स्टोर अनिल मित्तल से वरिष्ठ केके शर्मा हैं, लेकिन वे अभी तक अधिशाषी अभियंता हैं। ऐसे उदाहरणों को देखते हुए शासन ने न केवल दोहरी आरक्षण पद्धति को निरस्त किया है, बल्कि तीन दिन के अंदर पदों की स्थिति साफ न होने पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। शासनादेश के बाद पीवीवीएनएल के अधिकारी आरक्षण के दोहरे लाभ से उच्च पदों पर बैठे एससी और एसटी अधिकारियों की सूची खंगालने में लगे हैं। इस फैसले के परवान चढ़ने पर कई मतहत अपने बॉस के बॉस बन जाएंगे और बॉस मातहत।

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